Online Puja & Pandit Booking
+91 91115 12346

विश्वकर्मा जयंती

भगवान विश्वकर्मा पूजा 2026: निर्माण, शिल्प और कौशल का महापर्व

विश्वकर्मा पूजा भारत के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों में से एक है। यह दिन ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार, भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें "देवताओं का इंजीनियर" और "सृष्टि का शिल्पकार" माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व तकनीक, विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत संगम के रूप में मनाया जाएगा।

वर्ष 2026 में पूजा की तिथि और विशेष मुहूर्त

वर्ष 2026 में विश्वकर्मा पूजा बृहस्पतिवार, 17 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन सौर कैलेंडर के अनुसार 'कन्या संक्रांति' का होता है।

  • विश्वकर्मा पूजा तिथि: 17 सितंबर, 2026 (गुरुवार)
  • कन्या संक्रान्ति का क्षण:प्रातः 07:58 AM
  • विशेष संयोग: इस वर्ष पूजा गुरुवार को होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि बृहस्पति (गुरु) को ज्ञान और कौशल का कारक माना जाता है।

2026 का ज्योतिषीय परिदृश्य: ग्रह, नक्षत्र और तिथियाँ

2026 की विश्वकर्मा पूजा ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी होने वाली है। इस दिन ग्रहों की स्थिति शिल्पकारों और व्यापारियों के लिए विशेष लाभ लेकर आ रही है:

1.कन्या संक्रांति: 17 सितंबर को सूर्य देव सुबह 07:58 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय को 'पुण्य काल' माना जाता है, जिसमें की गई पूजा का अक्षय फल मिलता है।
2.नक्षत्र और योग:इस दिन अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो कार्य सिद्धि और सफलता का प्रतीक है। साथ ही,'सर्वार्थ सिद्धि योग'का संयोग बनने की संभावना है, जो नए कार्यों की शुरुआत, मशीनरी की खरीद और व्यापारिक समझौतों के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
3.ग्रह स्थिति: सूर्य और बुध की कन्या राशि में उपस्थिति 'बुधादित्य योग' का निर्माण करेगी, जो बुद्धि, विवेक और तकनीकी कौशल में वृद्धि करने वाला है। शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में रहकर श्रम और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मजबूती प्रदान करेंगे।

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, विश्वकर्मा को सृजन का आदि देवता माना जाता है।

  • दिव्य वास्तुकार: उन्होंने सत्ययुग में स्वर्ग लोक, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारका और हस्तिनापुर जैसे भव्य नगरों का निर्माण किया।
  • शस्त्र निर्माता: देवताओं के शक्तिशाली अस्त्र, जैसे शिव का त्रिशूल, विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र, उन्हीं की कला का परिणाम हैं।
  • वाहन और यंत्र: उन्होंने मन की गति से चलने वाला पुष्पक विमान और देवताओं के दिव्य रथों का सृजन किया।

पूजा विधि और अनुष्ठान

यह पर्व 'कर्म ही पूजा है' के सिद्धांत पर आधारित है। इसे कारखानों, वर्कशॉप और दफ्तरों में निम्नलिखित विधि से मनाया जाना चाहिए:

1. उपकरण शुद्धि: पूजा से पूर्व मशीनों, लैपटॉप, औजारों और वाहनों की सफाई करें।
2. प्रतिमा स्थापना: प्रातः 07:58 बजे संक्रांति काल के बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें।
3. यंत्र पूजा:मशीनों पर रोली-अक्षत से तिलक लगाएं और "ॐ विश्वकर्मणे नमः" का जाप करते हुए रक्षासूत्र (कलावा) बांधें।
4. विश्राम का संकल्प: इस दिन औजारों का प्रयोग न करें और मशीनों को विश्राम दें। यह तकनीकी ऊर्जा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।
5.आरती और प्रसाद: अंत में आरती करें और बूंदी के लड्डू या हलवे का प्रसाद वितरित करें।

पौराणिक संदर्भ और कथाएं

  • सृष्टि का खाका: जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की कल्पना की, तो विश्वकर्मा ने ही उसे भौतिक स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने ही ब्रह्मांड के ढांचे और नक्षत्रों को व्यवस्थित किया।
  • सूर्य का तेज कम करना: उनकी पुत्री संज्ञा का विवाह सूर्य देव से हुआ था। सूर्य के असहनीय तेज को कम करने के लिए विश्वकर्मा ने उसे तराशा, जिससे निकले अंश से सुदर्शन चक्र और त्रिशूल का निर्माण हुआ।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

यह त्योहार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है:

  • श्रम का सम्मान: यह मजदूरों और कारीगरों के पसीने की कीमत और उनके कौशल को सम्मान देता है।
  • तकनीकी जागरूकता: आधुनिक युग में यह इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को नवाचार की प्रेरणा देता है।
  • एकता: इस दिन कारखानों में मालिक और श्रमिक एक साथ बैठकर पूजा करते हैं, जिससे औद्योगिक शांति और सद्भाव बढ़ता है।

निष्कर्ष

विश्वकर्मा पूजा 2026 हमें यह याद दिलाती है कि हमारे हाथ की कला और मस्तिष्क की तकनीक ईश्वर का ही उपहार है। 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के पावन क्षण (07:58 AM) पर की गई यह आराधना न केवल हमारे व्यापार में समृद्धि लाएगी, बल्कि हमें राष्ट्र निर्माण के लिए नई ऊर्जा भी प्रदान करेगी। चाहे वह एक छोटा सा पेचकस हो या अंतरिक्ष में जाने वाला रॉकेट, भगवान विश्वकर्मा की चेतना हर उस निर्माण में मौजूद है जो मानवता के कल्याण के लिए है।

For Customer
Login Register
Join as Partner

Become Pandit, Agent or Associate
Click below button to register or login

Join as Partner

For any query call us:

+91 9111512346
Your Cart

Your cart is currently empty.
Let us help you find the perfect item!