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नाग पंचमी: श्रद्धा, शुद्धता और आध्यात्मिक आराधना का पर्व 🐍

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल सावन माह की कृष्ण पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है। इस दिन नवनाग की पूजा की जाती है। नाग पंचमी के दिन माना जाता है कि नाग देवता और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को काल सर्प दोष से राहत मिल सकती है। इसके लिए उन्हें नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसी के साथ नाग पंचमी के दिन जरूरतमंदों को दान आदि करना भी काफी शुभ माना गया है।

कब मनाई जाएगी नाग पंचमी (Nag Panchami Muhurat)

नाग पंचमी मंगलवार 29 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन पर शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -

प्रारम्भ : सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारम्भ 28 जुलाई को रात 11 बजकर 24 मिनट पर हो रहा है।

समापन : वहीं पंचमी तिथि का समापन 30 जुलाई को देर रात 12 बजकर 46 मिनट पर होगा।

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त : सुबह 06 बजकर 13 मिनट से सुबह 08 बजकर 49 मिनट तक

विधि

  • प्रातः उठकर घर की सफाई कर नित्यकर्म से निवृत्त हो जाएँ।
  • पश्चात स्नान कर साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजन के लिए सेंवई-चावल आदि ताजा भोजन बनाएँ। कुछ भागों में नागपंचमी से एक दिन भोजन बना कर रख लिया जाता है और नागपंचमी के दिन बासी खाना खाया जाता है।
  • इसके बाद दीवाल पर गेरू पोतकर पूजन का स्थान बनाया जाता है। फिर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवाल पर घर जैसा बनाते हैं और उसमें अनेक नागदेवों की आकृति बनाते हैं।
  • कुछ जगहों पर सोने, चांदी, काठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों बगलों में पाँच फन वाले नागदेव अंकित कर पूजते हैं।
  • सर्वप्रथम नागों की बांबी में एक कटोरी दूध चढ़ा आते हैं।
  • और फिर दीवाल पर बनाए गए नागदेवता की दधि, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर सेंवई व मिष्ठान से उनका भोग लगाते हैं।
  • पश्चात आरती कर कथा श्रवण करना चाहिए।

नागपंचमी के दिन क्‍या करें

  • इस दिन नागदेव का दर्शन अवश्य करना चाहिए।
  • बांबी (नागदेव का निवास स्थान) की पूजा करना चाहिए।
  • नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है।
  • ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा का जाप करने से सर्पविष दूर होता है।
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