शिव अभिषेक
रुद्राभिषेक पूजा से घर से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बनता है। रुद्राभिषेक करने से इस जन्म के साथ पिछले जन्म के भी पातक पाप नष्ट हो जाते है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान रूद्र में सभी देवताओं का वास होता है, इसलिए जब हम रुद्राभिषेक करते है तो सभी देवता प्रसन्न होते है। किसी व्यक्ति को यदि कालसर्प योग लगा हो तो उसे शिव रुद्राभिषेक करना चाहिए, इससे कालसर्प योग का प्रभाव दूर होता है। यदि श्रावण के महीने में रुद्राभिषेक करते है तो यह अति फलदायी होता है।
Puja starts from ₹1001.00
Puja Duration: 1 hour
Culture/Rituals: Hindi
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सनातन धर्म में भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है। अर्थात भोले-भाले भक्तों के नाथ। शिव अपने भक्तों की भोलेपन से की गई पूजा को भी तुरंत स्वीकार कर मनोवांछित फल प्रदान कर देते है। इसके कई उदाहरण है आम जनमानस में प्रचलित है। वैसे तो शिव को केवल ध्यान लगाकर भी प्रसन्न किया जा सकता है, लेकिन शिवपूजन में अभिषेक का विशेष महत्व है। शिवपुराण के अनुसार ऋषियों के पूछने पर स्वयं भगवान शिव ने कहा है कि आसक्तियों से रहित होकर जो मेरा अभिषेक करेगा , जीवन में व्याप्त समस्त प्रकार के दुख और संताप से छुटकारा पाएगा। जब हम शिव अभिषेक करते है तो स्वयं शिव उसे ग्रहण करते है। शिव अभिषेक से संसार में ऐसी कोई वस्तु, वैभव, सुख समृद्धि नहीं है, जो हमें प्राप्त नहीं हो सकती है। आप भी महादेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक करें।
क्यों किया जाता है भगवान शिव का अभिषेक?
महाप्रलय के कारण सभी अनमोल रत्न और जरूरी औषधियां समुद्र में समा गई थीं तो श्री हरि विष्णु ने उन सभी वस्तुओं को पुनः प्राप्त करने के लिए देवता और दानवों को समुद्र मंथन का आदेश दिया। इतने विशालकाय समुद्र की मथनी भी विशाल होनी चाहिए, इसलिए भगवान विष्णु के ही कहने पर मंदराचल पर्वत को मथनी, वासुकी नाग को रस्सी व मंदराचल को सभालने का कार्य स्वयं श्रीहरि ने कच्छप अवतार लेकर किया। समुद्र मंथन का आरम्भ हुआ।
सबसे पहले समुद्र से प्राप्त हुआ विष और यह कोई मामूली विष नहीं था। यह संसार का सबसे विषैला विष था जिसका नाम था हलाहल। इस विष से निकलने वाली गंध से ही देव, दैत्य समेत सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मच गया। कोई उपाय ना निकलता देख भगवान विष्णु ने सभी देवों और दैत्यों को त्रिपुरारी भगवान शिव शंकर के पास भेजा। सभी जन भगवान शिव के पास गए और उनसे रक्षा की भीख मांगने लगे। कोई उपाय ना मिलने और विष से होने वाले दुष्प्रभाव से सम्पूर्ण जगत को बचाने के लिए महादेव ने खुद विष का पान किया, यह देख माता पार्वती ने अपने हाथ से विष को भोलेनाथ के कंठ में ही रोक लिया। विष के दुष्प्रभाव से भगवान शिव का कंठ नीला हो गया और तभी से उनका एक नाम नीलकंठ भी पड़ा।
अत्यधिक विषैला होने के कारण उस विष ने भोलेनाथ के शरीर का तापमान बढ़ा दिया, जिससे उन्हें कष्ट होने लगा। कैलाश जैसी ठंडे स्थान पर भी भोलेनाथ पसीने-पसीने हो गए, जिसे देख सभी देवताओं और दैत्यों ने उनका जल से अभिषेक कर उनकी सहायता की। तभी से भोलेनाथ को जल चढ़ाया जाने लगा। और तरह से अभिषेक की शुरुवात हुई।
रुद्राभिषेक पूजन विधि:
सनातन परंपरा में भगवान शिव को सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माना जाता है। भगवान शिव की पूजा में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है, जिसे शुभ और फलदायी माना जाता है। खासकर सावन के सोमवार को रुद्राभिषेक करने का महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं भगवान शिव के रुद्राभिषेक की इस पारंपरिक विधि के बारे में। पूजन सामग्री- धतूरा, बेलपत्र, दही, चीनी, ऋतु फल, भस्म, चंदन, दूध, शहद, भांग, अनार, गन्ने, सफेद फूल, गंगाजल, मिठाई आदि।
• शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापितकररुद्राभिषेक करें।
• जलाभिषेक करें, शिवजी को ताजे जल से स्नान कराएं, फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
• फिर शुद्ध जल, दूध, दही, गन्ने का रस, अनार का रस आदि से अभिषेक करें।
• अभिषेक के दौरान शिव मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें।
• इसके बाद चंदन और भस्म का लेप लगाएं।
• फिर पान, बेलपत्र और बची हुई पूजन सामग्री चढ़ाएं।
• फिर भगवान को उनका पसंदीदा प्रसाद चढ़ाएं।
• 108 बार शिव मंत्र का जाप करें और आरती करें।
• आरती के बाद प्रसाद बांटें।
Puja Samagri List
थाली 2 नग
कटोरी 7 कटोरी
ताम्बे के लोटे 2 नग
दुब
गुलाब
फल 1 किलो
दूध 1 किलो
दही 250 ग्राम
घी 100 ग्राम
शहद 10 रू
धतूरे के फूल और फल 5 नग
बेल पत्ते 21 पत्ते
समी पत्ते 11 पत्ते
पान के पत्ते 5 पत्ते
फूल + माला 2 माला
मिठाई 500 ग्राम
अबीर 10 रु
गुलाल 10 रु
रोली 10 रु
सिंदूर 10 रु
अष्टगंध 15 रु
हल्दी 15 रु
गोल सुपारी 3 नग
जनेऊ 2 नग
रक्क्षा सूत्र 1 नग
नारियल 2 नग
इत्र 1 शीशी
कपूर 50 ग्राम
चावल 100 ग्राम
अगरबत्ती 1 पैकेट
धुप बत्ती 1 पैकेट
फूल बत्ती 1 पैकेट
शक्कर 100 ग्राम
गंगाजल 1 शीशी
पंचमेवा 1 पैकेट
दीपक/ दिया 3 नग
लौंग 10 रु
इलाइची 10 रु
भांग 20 रु
भस्मी 1 पैकेट
माचिस 1 नग
Additional Information
रुद्राभिषेक से होने वाले लाभ:
1. रुद्राभिषेक कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए कराया जाता है, शिव कृपा से ग्रह दोष शांत हो जाते हैं एवं व्यक्ति उन्नति करता है।
2. अपने शत्रुओं को पराजित या फिर कार्य में सफलता प्राप्त करनी है तो भी रुद्राभिषेक कराना फलदाई साबित होता है।
3. अकाल मृत्यु का भय या फिर किसी असाध्य रोग से पीड़ित हो तो रुद्राभिषेक लाभकारी है।
4. सुख, शांति, धन- संपत्ति, वैभव आदि की प्राप्ति के लिए भी रुद्राभिषेक एक महत्पूर्ण पूजन है. शिव अशीष से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
5. नए वाहन एवं मकान की चाह है तो दही से रुद्राभिषेक फलदाई होता है।
मंत्र उच्चारण:
ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च, मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति, ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय् ॥
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

