ग्रह शांति पूजा
सनातन परंपरा के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। ग्रहों का हम पर आशीर्वाद बना रहे, इसलिए ग्रह शांति पूजा अनुष्ठानों की परंपरा शुरू हुई है। ग्रह शांति पूजा अनुष्ठानों और पूजाओं का एक समूह है। इससे ग्रहों की स्थिति शुभ होती है और बाधाएं दूर होती हैं।
Puja starts from ₹501.00
Puja Duration: 1 hour
Culture/Rituals: Hindi
Puja Samagri: View Samagri List
Proceed to Book Chat on WhatsApp
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों के बारे में विस्तार से बताया गया है। सूर्य, मंगल, राहु, केतु, गुरु, शुक, चंद्र, बुध और शनि नवग्रह हैं। नवग्रहों को दो वर्गों में बांटा है। इनमें राहु और केतु मायावी ग्रह हैं। सूर्य देव आत्मा के कारक हैं। चंद्र देव मन के कारक हैं। मंगल देव ऊर्जा के कारक हैं। शनिदेव कर्मफल दाता हैं। बुध देव वाणी और बुद्धि के कारक हैं। गुरु देव ज्ञान के कारक हैं। वहीं, शुक्र देव सुख के कारक हैं। कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहने पर जातक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं शुभ कार्यों में सफलता मिलती है। ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल होने पर जातक को जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए ज्योतिष नवग्रह पूजा करने की सलाह देते हैं। इससे कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल हो जाती है। साथ ही नवग्रह देवताओं की कृपा जातक पर बरसती है।
विधि
पूजा के लिए एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां पर एक ताजे वस्त्र पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र रखें। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री को पहले से एकत्रित कर लें, जैसे कि फूल, धूप, दीपक, तिल, चावल, मिठाई आदि।
सबसे पहले अपने घर के देवी-देवताओं की पूजा करें। फिर भगवान गणेश जी की पूजा करें और उनका आह्वान करें, ताकि पूजा में कोई विघ्न न आए। ग्रहों का आह्वान और शांति मंत्र:। अब आप उस ग्रह के लिए शांति मंत्र का जाप करें, जिसके प्रभाव को शांत करना है। उदाहरण स्वरूप, यदि शनि का प्रभाव है, तो शनि मंत्र का जाप करें।
शनि शांति मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नम:।
मंगल शांति मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:।
राहु शांति मंत्र: ॐ रां राहवे नम:।
केतु शांति मंत्र: ॐ कें केतवे नम:।
ग्रह विशेष पूजा (हवन)
यदि संभव हो, तो हवन का आयोजन करें। हवन में तिल, घी, और औषधियां अर्पित की जाती हैं, और विशेष रूप से ग्रह शांति हवन किया जाता है। हवन करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। पूजा के दौरान संबंधित ग्रह के मंत्रों का जप करें। यह मंत्र 108 बार या पूरे हवन विधि के दौरान लगातार जपें। आप वैदिक ज्योतिष के पंडित से सलाह लेकर अपनी जन्मकुंडली के अनुसार मंत्र जाप भी करवा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें और सभी उपस्थित लोगों को आशीर्वाद दें। पूजा के दौरान भगवान से अपना जीवन सुखी और समृद्ध बनाने की प्रार्थना करें। पूजा शुद्ध मन से और सच्चे भाव से करें। यदि आपको ग्रहों के अशुभ प्रभाव से संबंधित कोई विशेष समस्या हो, तो आप किसी योग्य ज्योतिषी से मार्गदर्शन ले सकते हैं। ग्रह शांति पूजा नियमित रूप से करने से जीवन में शांति, सुख, और समृद्धि बनी रहती है।
Puja Samagri List
- दूध 100 ग्राम
- दही 100 ग्राम
- पान के पत्ते 7 नग
- मिठाई 500 ग्राम
- फल 1 किलो
- फूल माला 5 माला
- फूल 250 ग्राम
- आम के पत्ते 11 नग
- थाली 2 नग
- हवन कुंड 1 नग
- ताँबे के लोटे 1 नग
- लकड़ी का पटा 1 नग
- नारियल 1 नग
- सुपारी 11 नग
- लौंग 10 ग्राम
- इलायची 10 ग्राम
- रोली 1 पैकेट
- मोली 1 गोली
- जनेऊ 7 नग
- देशी घी 1 किलो ग्राम
- शहद 250 ग्राम
- शक्कर 250 ग्राम
- साबुत चावल 1 किलो ग्राम
- पंच मेवा 250 ग्राम
- धूप 1 पैकेट
- अगरबत्ती 1 पैकेट
- हवन सामग्री 1 किलो ग्राम
- जौ 250 ग्राम
- काले तिल 250 ग्राम
- दीपक/दीया 1 नग
- रूई 1 पैकेट
- पीला कपड़ा 1 मीटर
- कपूर 100 ग्राम
- दोने 1 पैकेट
- आम की लकडियां 2 किलो ग्राम
Additional Information
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सभी नौ ग्रह भगवान शिव के अधीन रहते हैं। यदि आप नियम अनुसार भगवान शिव का जलाभिषेक, आराधना, पूजा-पाठ आदि करते हैं तो आपको बहुत से फायदे होंगे. सभी ग्रह भगवान शिव के ही अंश है। ग्रहों की अलग-अलग महत्ता है। विशेष ज्योतिष में इन नौ ग्रहों का बहुत महत्व है। माना जाता है कि इन ग्रहों की चाल और स्थिति से भाग्य, व्यक्तित्व, और जीवन की घटनाएं बनती हैं
सूर्य- सूर्य की पूजा से साहस-ताकत बढ़ती है. शत्रुओं पर प्रभुत्व, सफलता और यश, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है. पुराने मर्ज भी दूर होते हैं.
चंद्रमा- चंद्रमा की पूजा से मानसिक शांति, आकर्षक व्यक्तित्व, भावनाओं पर नियंत्रण होता है. यह धन, प्रसिद्धि और जीवन में सफलता के लिए फायदेमंद है.
मंगल- मंगल पूजा स्वास्थ्य, धन, शक्ति और समृद्धि देती है. दुर्घटनाओं, वारदात, हमले या कारावास की आशंका घटाती है।
बुध- बुध की पूजा से ज्ञान, व्यावसायिक सफलता और वृद्धि मिलती है. धन, तंत्रिका तंत्र और शरीर के कार्यों से संबंधित बीमारियों से राहत मिलती है.
बृहस्पति- बृहस्पति की पूजा नकारात्मक, बुरी भावनाएं दूर करती है. पुण्य शक्ति और वीरता देती है. स्वास्थ्य और दीर्घायु, उच्च शिक्षा और दार्शनिक कौशल, धन और भाग्य, संतान संबंधी आशीर्वाद और धार्मिक प्रवृत्ति प्रदान करती हैं.
शुक्र- शुक्र की पूजा अच्छे और मजबूत प्रेम और रिश्तों, लंबी उम्र, धन समृद्धि, शिक्षा, कला में उन्नति का आशीर्वाद देती है. इसके लिए मंत्र:
शनि- शनि की पूजा मानसिक शांति, स्वास्थ्य ,खुशी और समृद्धि को बढ़ावा देती है. यह विपत्तियों के कारण कठिनाई की तीव्रता घटाने के लिए महत्वपूर्ण है.
राहु- राहु की पूजा दीर्घायु, शक्ति वृद्धि चीजों की गहरी समझ और उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है.
केतु- केतु की पूजा स्वास्थ्य, धन, भाग्य, घरेलू खुशी और भक्त की समृद्धि को बढ़ावा देती है. इस पूजा से जहरीले पदार्थों से होने वाली संपत्ति और मृत्यु के नुकसान की आशंका कम होती है.

