भूमि पूजन
माना जाता है यदि भूमि पर किसी भी प्रकार का कोई दोष या नकारत्मक ऊर्जा का वास है तो भूमि पूजन से हर प्रकार के दोष व नकारत्मक ऊर्जा से छुटकारा मिल जाता है। भूमि पूजा करने से उस जमीन अगर गलती वस कोई पाप कृत्य या कोई भी अपराध हुए रहते हैं तो भूमि पूजन से सभी चीजें समाप्त हो जाती है वह भूमि पवित्र हो जाती है।
Starts From ₹501.00
Puja Booking Price ₹101.00
Puja Duration: 30 mins
Culture/Rituals: Hindi
Puja Samagri: View Samagri List
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भूमि पूजन का महत्व
आवास औरव्यवसाय स्थल के लिए निर्माण हेतु जब हम नई भूमि खरीदते हैं, तो उस भूमि पर निर्माण कार्य करने से पूर्व धरती मां, भगवान वास्तु देवता और उस क्षेत्र के क्षेत्रपाल और कक्षप, सर्प, कलश आदि देवताओं से हम भूमि की शुद्धि हेतु प्रार्थना करते हैं एवं निर्माण कार्य की आज्ञा मांगते हैं। इनकी पूजा के प्रभाव से भूमि में नकारात्मकता का निदान होकर सकारात्मक ऊर्जा का सन्निवेश होता है। भूमि पूजन भूमिगत आश्रय लेने वाले जीवों से प्रार्थना हेतु भी आवश्यक है, क्योंकि जब हम भूमि खरीदते हैं तो कहीं न कहीं किसी न किसी की भावनाओं को आहत करते है। इसके साथ ही निर्माण के समय अज्ञातवश, जिस भी जीव को हानि पहुंचती है उसका दोष पाप भूस्वामी को लगता है, अतः अज्ञातवश हुए अपराध की क्षमा के निमित्त शास्त्रों में भूमि पूजन का विधान किया गया है। भूमि पूजन करने मात्र से गृह निर्माण संबंधि सारे पाप समाप्त हो जाते हैं।
कैसे करें भूमि पूजन?
भूमि पूजन करने के लिये हमें सबसे पहले उसकी सही विधि पता होनी चाहिए। और इसके लिये हम हिंदू कैलेंडर को देखकर भूमि पूजा के लिए शुभ तिथि का चयन करना चाहिए। शुभ माह, मुहूर्त, तिथि और नक्षत्र की जांच करनी चाहिए। पूजा अनुष्ठान समुदाय और क्षेत्र के आधार पर भिन्न होते हैं। आम तौर पर, भूमि पूजा अनुष्ठान में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं।
भूमि पूजन की विधि
सबसे पहले पूजन के दिन प्रात:काल उठकर जिस भूमि का पूजन किया जाना है वहां सफाई कर उसे शुद्ध कर लेना चाहिये। पूजा के लिये किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण की सहायता लेनी चाहिये। पूजा के समय ब्राह्मण को उत्तर मुखी होकर पालथी मारकर बैठना चाहिये। जातक को पूर्व की ओर मुख कर बैठना चाहिये। यदि जातक विवाहित है तो अपने बांयी तरफ अपनी अर्धांगनी को बैठायें। मंत्रोच्चारण से शरीर, स्थान एवं आसन की शुद्धि की जाती है। तत्पश्चात भगवान श्री गणेश जी की आराधना करनी चाहिये। भूमि पूजन में चांदी के नाग व कलश की पूजा की जाती है। वास्तु विज्ञान और शास्त्रों के अनुसार भूमि के नीचे पाताल लोक है जिसके स्वामी भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग भगवान हैं। मान्यता है कि शेषनाग ने अपने फन पर पृथ्वी को उठा रखा है। चांदी के सांप की पूजा का उद्देश्य शेषनाग की कृपा पाना है। माना जाता है कि जिस तरह भगवान शेषनाग पृथ्वी को संभाले हुए हैं वैसे ही यह बनने वाले भवन की देखभाल भी करेंगें। कलश रखने के पिछे भी यही मान्यता है कि शेषनाग चूंकि क्षीर सागर में रहते हैं इसलिये कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों द्वारा शेषनाग का आह्वान किया जाता है ताकि शेषनाग भगवान का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिले। कलश में सिक्का और सुपारी डालकर यह माना जाता है कि लक्ष्मी और गणेश की कृपा प्राप्त होगी। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और भगवान विष्णु का स्वरुप मानकर उनसे प्रार्थना की जाती है कि देवी लक्ष्मी सहित वे इस भूमि में विराजमान रहें और शेषनाग भूमि पर बने भवन को हमेशा सहारा देते रहें। भूमि पूजन विधि पूर्वक करवाया जाना बहुत जरुरी है अन्यथा निर्माण में विलंब, राजनीतिक, सामाजिक एवं दैविय बाधाएं उत्पन्न होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
Puja Samagri List
रोली 10 रु
अबीर 10 रु
गुलाल 10 रु
सिन्दूर 10 रु
अस्टगंध 15 रु
गोल सुपारी 5 नग
रक्षा सूत्र 1 नग
जनेऊ 2 नग
चावल 50 ग्राम
अगरबत्ती 1 पैकेट
फुलबत्ती 1 पैकेट
घी 50 ग्राम
दीपक 2 नग
नारियल 2 नग
माचिस 1 नग
लाल कपडा 1/2 मीटर
लौंग 10 रु
इलाइची 10 रु
थाली 2 नग
कटोरी 5 नग
मिठाई 250 ग्राम
फल 200 ग्राम
आम के पत्ते 5 नग
पान के पत्ते 5 नग
माला 1 माला
फुल 100 ग्राम
कलश 2 नग
Additional Information
भूमि पूजन करते समय चौथी, नौवीं और चौदहवीं तिथि से बचना चाहिए, क्योंकि ये गृह निर्माण या भूमि पूजन के लिए शुभ नहीं मानी जाती हैं। भूमि पूजन और गृह निर्माण शुरू करने के लिए शुभ तिथियों का चयन करते समय, यह जांचना चाहिए कि क्या वह महीना शुभ है, जिसमें शुभ मुहूर्त, तिथियाँ और नक्षत्र शामिल हैं। इसलिए भूमि पूजन से पहले अच्छे से सलाह लें
पंडित और वास्तु शास्त्री की परामर्श से पहले यह निश्चित कर लें के राहू का मुख, पीठ एवं पुच्छ किस दिशा में स्थित है उसके बाद ही भूमि पूजन व नींव खुद्वानी चाहिये । नींव खोदने में वास्तु शास्त्री की परामर्श से चिन्हित स्थान जिस गृह नक्षत्र में वास्तु पुरुष का शरीर भेदन न हो उस स्थान या बिंदु से ही नींव खोदना आरंभ करना चाहिये। यदि सभी कार्य सही समय और सही विधि से कियें जाए, तो इससे भूमि पर बिना किसी परेशानी के काम पूरा हो जाता है। और इसमें रहने वाले लोगो को सुख़-समृद्धि प्रदान करता है।
भूमि पूजन या गृह निर्माण के दौरान रखी जाने वाली पहली नींव को शिलान्यास कहते हैं। वास्तु के अनुसार, नींव खोदने के लिए सही स्थान और सही समय का पता लगाना जरूरी है। नींव शुभ मुहूर्त और घर के मालिक के नाम के आधार पर चुनी जाती है।
