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स्कंद षष्ठी

स्कंद षष्ठी 2026: भगवान कार्तिकेय की शक्ति और विजय का पर्व

स्कंद षष्ठी, जिसे 'कंध षष्ठी' भी कहा जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के शौर्य को समर्पित है। वर्ष 2026 में जून के महीने में आने वाली आषाढ़ स्कंद षष्ठी विशेष ग्रह संयोगों के कारण अत्यंत फलदायी मानी जा रही है।

जून 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का विवरण इस प्रकार है:

  • मुख्य तिथि: 20 जून, 2026 (शनिवार)
  • षष्ठी तिथि प्रारम्भ: 20 जून को दोपहर 01:52 PM बजे से।
  • षष्ठी तिथि समाप्त: 21 जून को दोपहर 12:26 PM बजे तक।
  • विशेष: चूँकि षष्ठी तिथि शनिवार को दोपहर में व्याप्त है, इसलिए मुख्य पूजा और व्रत 20 जून को ही किया जाएगा।

वर्ष 2026 की ज्योतिषीय गणना: ग्रह, नक्षत्र और संयोग

20 जून 2026 को आकाश मंडल में कई महत्वपूर्ण खगोलीय स्थितियां बन रही हैं:

  1. वार संयोग: यह पर्व शनिवार को पड़ रहा है। शनि और मंगल (कार्तिकेय मंगल के स्वामी देव हैं) का यह संगम अनुशासन और साहस की वृद्धि करता है।
  2. नक्षत्र: इस दिन मघा नक्षत्र रहेगा। मघा नक्षत्र के अधिपति 'पितृ' हैं और इसके स्वामी केतु हैं। भगवान कार्तिकेय की पूजा इस दिन करने से केतु और मंगल के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।
  3. शुभ योग: इस दिन 'सिद्धि योग' का निर्माण हो रहा है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किया गया कोई भी संकल्प या अनुष्ठान सिद्ध होता है।
  4. चंद्र राशि:चंद्रमा सिंह राशि (सूर्य की राशि) में संचरण करेंगे। सिंह राशि नेतृत्व और शक्ति का प्रतीक है, जो सेनापति कार्तिकेय के स्वरूप से पूर्णतः मेल खाती है।

स्कंद षष्ठी क्या है?

भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं। 'स्कंद' उनका एक प्रमुख नाम है और 'षष्ठी' वह तिथि है जिस दिन उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से अधर्म का विनाश किया था। उत्तर भारत में इन्हें भगवान गणेश का बड़ा भाई माना जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इन्हें 'मुरुगन' के नाम से पूजा जाता है।

पौराणिक कथा: तारकासुर का वध

तारकासुर राक्षस के आतंक से देवताओं को मुक्त करने के लिए महादेव के तेज से कार्तिकेय का जन्म हुआ। उन्होंने स्कंद षष्ठी के दिन ही अपने दिव्य अस्त्र 'वेल' (भाला) से तारकासुर का वध किया था। यह दिन हमारे भीतर के अहंकार और बुराई को समाप्त करने का प्रतीक है।

पूजा विधि: 20 जून 2026 के लिए विशेष

  • प्रातः स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। शनिवार का दिन होने के कारण जल में थोड़े काले तिल मिलाना शुभ होगा।
  • स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कार्तिकेय जी की मूर्ति रखें। उनके अस्त्र 'वेल' या मोरपंख का पूजन अवश्य करें।
  • अभिषेक:पंचामृत से अभिषेक के बाद उन्हें लाल चंदन और लाल पुष्प (जैसे गुड़हल) अर्पित करें।
  • विशेष अर्पण: शनि-मंगल संयोग के कारण इस दिन उन्हें नीले रंग के फूल चढ़ाना और चमेली के तेल का दीपक जलाना शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
  • कवच पाठ: 'कंध षष्ठी कवचम' का पाठ 2026 की इस षष्ठी पर विशेष सुरक्षा प्रदान करने वाला है।

क्या करें और क्या न करें?

  • क्या करें: 20 जून को पूरे दिन "ॐ शरवण भवाय नमः" का मानसिक जाप करें। जमीन पर शयन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • क्या न करें:शनिवार होने के कारण इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का त्याग अनिवार्य है। किसी भी असहाय व्यक्ति का अपमान न करें।

व्रत का फल

2026 की इस स्कंद षष्ठी पर पूजा करने से मंगल दोष और केतु जनित बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह व्रत साहस, आत्मविश्वास और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अचूक माना गया है।

निष्कर्ष:

20 जून 2026 की स्कंद षष्ठी केवल एक कथा नहीं, बल्कि ग्रहों के शुभ प्रभाव से स्वयं को ऊर्जावान बनाने का स्वर्णिम अवसर है।

।। जय मुरुगन ।।

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