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ओणम

ओणम 2026: तिथि, मुहूर्त और खगोलीय महत्व

ओणम केरल का सबसे भव्य सांस्कृतिक उत्सव है, जो राजा महाबली की गरिमा और न्यायप्रिय शासन की याद दिलाता है। साल 2026 में यह त्योहार अपनी पूरी भव्यता के साथ निम्नलिखित समय पर मनाया जाएगा:

महत्वपूर्ण मुहूर्त और तिथियां (2026)

इस वर्ष ओणम का मुख्य उत्सव, थिरुवोणम, बुधवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मुख्य समय इस प्रकार है:

  • थिरुवोणम (मुख्य दिन): बुधवार, 26 अगस्त, 2026
  • थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ: 25 अगस्त, 2026 को रात 10:51 बजे से
  • थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त: 27 अगस्त, 2026 को रात 12:48 बजे तक

2026 के महत्वपूर्ण ग्रह, नक्षत्र और तिथियां

इस वर्ष ओणम के दौरान ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों का संयोग इसे और भी खास बना रहा है:

  • नक्षत्र: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह उत्सव श्रवण (थिरुवोणम) नक्षत्र में मनाया जाता है। चंद्रमा जब मकर राशि और श्रवण नक्षत्र में गोचर करता है, तो यह समय समृद्धि और ज्ञान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • तिथि: 2026 में थिरुवोणम भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के आसपास पड़ रहा है।
  • लग्न: इस वर्ष थिरुवोणम के दिन वृषभ और सिंह लग्न की प्रधानता रहेगी, जो स्थिरता और शाही वैभव के प्रतीक हैं, जो राजा महाबली के 'स्वर्ण युग' की याद दिलाते हैं।
  • ग्रह स्थिति: अगस्त 2026 में सूर्य अपनी स्वराशि सिंह (Chingam) में विराजमान रहेंगे, जो ऊर्जा और नेतृत्व का संचार करेंगे।

पौराणिक कथा: राजा महाबली और वामन अवतार

ओणम की कथा राजा महाबली के त्याग की है। उनके शासन में प्रजा सुखी थी, जिससे देवताओं को ईर्ष्या हुई। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर तीन पग भूमि मांगी। दो पग में ब्रह्मांड नापने के बाद, महाबली ने अपना सिर तीसरे पग के लिए समर्पित कर दिया। उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का वरदान दिया, जिसे हम ओणम के रूप में मनाते हैं।

उत्सव के मुख्य आकर्षण

  • पूक्कलम (फूलों की कालीन): 10 दिनों तक घरों के बाहर फूलों की रंगोली सजाई जाती है। 26 अगस्त को थिरुवोणम के दिन यह अपने सबसे विशाल रूप में होगी।
  • ओणम साध्या (महाभोज): केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला 26 व्यंजनों का शुद्ध शाकाहारी भोजन। इस साल बुधवार का दिन होने के कारण साध्या का महत्व और बढ़ जाता है।
  • वल्लम कली (नौका दौड़): केरल की नदियों में सर्प नौकाओं की दौड़, जो टीम वर्क और साहस का प्रदर्शन करती है।
  • पुलिकली (बाघ नृत्य): शरीर पर बाघ की पेंटिंग बनाकर किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य।

आधुनिक और वैश्विक महत्व

आज ओणम केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एकता का संदेश है। 2026 में भी, दुनिया भर के मलयाली समुदाय—चाहे वे खाड़ी देशों में हों या अमेरिका में—अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए थिरुवोणम के मुहूर्त का पालन करते हुए इस उत्सव को मनाएंगे। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि निस्वार्थ सेवा और समानता ही एक आदर्श समाज की पहचान है।

शुभ ओणम 2026!

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