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नाग पंचमी

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है। इस दिन नवनाग की पूजा की जाती है। नाग पंचमी के दिन माना जाता है कि नाग देवता और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को काल सर्प दोष से राहत मिल सकती है। इसके लिए उन्हें नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए और उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसी के साथ नाग पंचमी के दिन जरूरतमंदों को दान आदि करना भी काफी शुभ माना गया है।भगवान शिव के गले में सर्प विराजमान रहते हैं, और भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं, इसलिए नागों का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

नाग पंचमी की पौराणिक कथा

 प्राचीन समय में एक गाँव में एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। वह बहुत मेहनती था और अपने खेतों में दिन-रात काम करता था। एक दिन वह अपने खेत में हल चला रहा था। उसी खेत में एक नागिन अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी। दुर्भाग्यवश, जब किसान हल चला रहा था, तब उसके हल से नागिन के बच्चों की मृत्यु हो गई। यह घटना पूरी तरह अनजाने में हुई, लेकिन इसका परिणाम बहुत भयानक हुआ।जब नागिन अपने बिल में लौटी और उसने अपने बच्चों को मृत पाया, तो वह अत्यंत क्रोधित हो गई। मातृत्व के दुख और क्रोध में वह बदला लेने के लिए किसान के घर पहुँची। रात के समय नागिन ने किसान, उसकी पत्नी और उसके पुत्रों को डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। पूरा घर शोक और भय में डूब गया।लेकिन किसान की एक बेटी थी, जो बहुत ही सरल, दयालु और धार्मिक स्वभाव की थी।

जब नागिन उसके सामने आई, तो उसने डरने के बजाय श्रद्धा और विनम्रता दिखाई। उसने नागिन को दूध से भरा कटोरा अर्पित किया, फूल चढ़ाए और हाथ जोड़कर क्षमा माँगी। उसने कहा कि उसके पिता से जो गलती हुई, वह अनजाने में हुई थी, इसलिए उन्हें क्षमा कर दिया जाए।लड़की की सच्ची भक्ति, नम्रता और करुणा से नागिन का क्रोध शांत हो गया। उसने महसूस किया कि बदले की भावना से केवल दुख बढ़ता है, जबकि क्षमा और दया से शांति मिलती है। नागिन ने प्रसन्न होकर लड़की से वर माँगने को कहा।ड़की ने अपने लिए कुछ नहीं माँगा, बल्कि अपने माता-पिता और भाइयों के जीवन की प्रार्थना की। नागिन उसकी निस्वार्थ भावना से अत्यंत प्रसन्न हुई और उसने उसके पूरे परिवार को पुनर्जीवित कर दिया।

इस चमत्कार से पूरा गाँव आश्चर्यचकित रह गया।इस घटना के बाद लोगों ने यह समझा कि सर्पों के साथ हमें क्रूरता नहीं, बल्कि सम्मान और संतुलन के साथ व्यवहार करना चाहिए। तभी से नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई, ताकि उनसे आशीर्वाद प्राप्त हो और जीवन में किसी प्रकार का भय या संकट न आए।

एक अन्य महत्वपूर्ण कथा  राजा जनमेजय से जुड़ी है। उनके पिता राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पराज तक्षक के डसने से हुई थी। इस कारण क्रोधित होकर जनमेजय ने सभी सर्पों को समाप्त करने के लिए एक विशाल “सर्प यज्ञ” का आयोजन किया। इस यज्ञ में शक्तिशाली मंत्रों के प्रभाव से सभी सर्प अग्नि में गिरने लगे और उनका विनाश होने लगा।तभी एक महान ऋषि आस्तिक मुनि वहाँ पहुँचे। उन्होंने राजा को समझाया कि सभी सर्प दोषी नहीं हैं और निर्दोष प्राणियों का विनाश करना अधर्म है। उन्होंने दया और धर्म का महत्व बताया। उनकी बातों से प्रभावित होकर राजा जनमेजय ने यज्ञ को तुरंत रोक दिया, जिससे शेष सर्पों का जीवन बच गया।नाग पंचमी का यह पर्व हमें गहरी शिक्षा देता है कि प्रकृति के हर जीव का अपना महत्व है। सर्प पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह त्योहार हमें दया, क्षमा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना सिखाता है। इस दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं, दूध, हल्दी, कुश और फूल अर्पित करते हैं तथा उनके संरक्षण और आशीर्वाद की कामना करते हैं।इस प्रकार नाग पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन और सम्मान का प्रतीक है, जो हमें यह सिखाता है कि सभी जीवों के साथ प्रेम और करुणा का व्यवहार करना ही सच्चा धर्म है।

नाग देवता की पूजा विधि

नाग देवता की पूजा करने के लिए आज तन और मन से पवित्र होने के बाद इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करने का संकल्प करें| फिर इसके बाद एक चौकी पर नाग देवता का चित्र या मूर्ति रखें|यदि आपके पास उनका चित्र या मूर्ति न हो तो आप भगवान शिव या फिर मनसा देवी की पूजा करें क्योंकि नागदेवता उनके साथ हमेशा बने रहते हैं|नाग पंचमी के दिन मिट्टी और चांदी से बने नाग की पूजा का भी विधान है, लेकिन यदि यह न संभव हो पाए तो आप किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग पर बने नाग देवता की पूजा भी कर सकते हैं|

नाग देवता की पूजा में सबसे पहले उन्हें कच्चे दूध और पवित्र जल से स्नान कराएं. नौ नागों - अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया का आह्वान किया जाता है |इसके पश्चात् उनका पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी, आदि से पूजन करें| नागपंचमी के दिन नाग देवता को भोग के रूप में दूध में चीनी मिलाकर देने का विधान है. इसके साथ आप फल का भी भोग लगा सकते हैं| नाग देवता की पूजा के साथ उनके आराध्य देव यानि भगवान शिव की पूजा करना बिल्कुल न भूलें| इसके बाद आप नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र का जाप करें तथा अंत में नाग देवता की आरती करके उनके सामने अपनी मनोकामना कहें|

 

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