मोहिनी एकादशी 2026: मोह-माया से मुक्ति और अमृत प्राप्ति का पावन पर्व
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को 'मोहिनी एकादशी' के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि विशेष महत्व रखती है क्योंकि इस दिन ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है जो साधकों को मानसिक शांति और पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होगा।
मोहिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए पारण और तिथि का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- मुख्य व्रत तिथि: 27 अप्रैल 2026, सोमवार
- एकादशी तिथि प्रारम्भ: 26 अप्रैल 2026 को 06:06 पी एम बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026 को 06:15 पी एम बजे तक
- पारण (व्रत तोड़ने का) समय: 28 अप्रैल 2026 को 05:43 ए एम से 08:21 ए एम तक
- द्वादशी तिथि समाप्ति समय: 28 अप्रैल 2026 को 06:51 पी एम बजे
2026 के विशेष ग्रह-नक्षत्र और ज्योतिषीय योग
इस वर्ष मोहिनी एकादशी पर आकाश मंडल में कई शुभ स्थितियाँ बन रही हैं:
- सोमवार का संयोग: सोमवार भगवान शिव का दिन है, जबकि एकादशी विष्णु जी की। इस दिन का संयोग 'हरि-हर' की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम है, जो मन के विकारों को दूर करता है।
- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र: इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके स्वामी शुक्र देव हैं। चूंकि मोहिनी अवतार सुंदरता और आकर्षण का प्रतीक है, अतः शुक्र के नक्षत्र में यह व्रत सुख-समृद्धि और सौंदर्य प्रदान करने वाला होगा।
- हर्षण योग: इस वर्ष एकादशी पर 'हर्षण योग' बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को कार्यों में सफलता और प्रसन्नता देने वाला माना गया है।
पौराणिक आधार: मोहिनी अवतार की कथा
समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कुंभ को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद हुआ, तब असुरों को भ्रमित करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। अपनी सुंदरता से उन्होंने असुरों को मोहित किया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया। जिस दिन यह घटना हुई, वह वैशाख शुक्ल एकादशी थी।
धृष्टबुद्धि के उद्धार की गाथा
महर्षि वशिष्ठ ने श्री रामचंद्र जी को बताया था कि भद्रावती नगरी के पापी राजकुमार धृष्टबुद्धि ने, जो कुसंगति के कारण दर-दर भटक रहा था, महर्षि कौंडिन्य की शरण ली थी। ऋषि के परामर्श पर उसने मोहिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे उसके मेरु पर्वत के समान विशाल पाप भी भस्म हो गए और उसे अंततः विष्णुलोक की प्राप्ति हुई।
2026 की पूजन विधि और नियम
- शुद्धिकरण: 27 अप्रैल की सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजन: भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को धूप, दीप, पीले फल और तुलसी दल अर्पित करें।
- सावधानी: एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित है। साथ ही इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें (एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।
- पारण: 28 अप्रैल को सुबह 05:43 से 08:21 के बीच सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
वैशाख दान का महत्व
2026 में इस समय गर्मी का प्रकोप अधिक होने के कारण, इस दिन जल सेवा (प्याऊ लगवाना), छाता, पंखा और मौसमी फल (तरबूज, खरबूजा) का दान करना साक्षात नारायण की सेवा के समान पुण्यदायी होगा।
निष्कर्ष: मोहिनी एकादशी का व्रत हमें सिखाता है कि आत्मबल और भक्ति से हम संसार के सबसे बड़े मोहजाल को काट सकते हैं।
॥ जय श्री हरि विष्णु ॥
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

