गुरु नानक जयंती 2026: 557 वाँ प्रकाश पर्व
गुरु नानक जयंती, जिसे 'गुरुपरब' या 'प्रकाश पर्व' भी कहा जाता है, सिख धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गुरु नानक देव जी की 557वीं जन्म वर्षगाँठ पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है।
वर्ष 2026: तिथि, समय और मुख्य मुहूर्त
हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में मुख्य पर्व 24 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस वर्ष के मुख्य मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
- गुरु नानक जयंती तिथि: मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: सोमवार, 23 नवंबर 2026 को रात 11:42 बजे से
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को रात 08:23 बजे तक
- विशेष नोट: क्योंकि पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय और मुख्य भाग 24 नवंबर को मिल रहा है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार देश-विदेश में 24 नवंबर को ही मुख्य उत्सव और लंगर का आयोजन किया जाएगा।
वर्ष 2026 का विशेष ज्योतिषीय दृष्टिकोण और ग्रह-नक्षत्र
वर्ष 2026 की कार्तिक पूर्णिमा बेहद खास है क्योंकि इस दिन आकाश मंडल में कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस प्रकाश पर्व की दिव्यता को और बढ़ा रहे हैं:
- कृतिका और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव:इस साल पूर्णिमा तिथि के दौरान चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जहाँ उनका संयोग रोहिणी नक्षत्र से होगा। ज्योतिष में चंद्रमा और रोहिणी का मिलन अत्यंत शुभ और मन को शांति देने वाला माना जाता है।
- बुधादित्य और गजकेसरी योग: इस समय सूर्य और बुद्ध की युति से बुधादित्य योग और गुरु-चंद्रमा की अनुकूल स्थिति से गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा, जो ज्ञान, अध्यात्म और लोक-कल्याण के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- सांस्कृतिक व पौराणिक जुड़ाव: हिंदू परंपरा में इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है और भगवान विष्णु के 'मत्स्य अवतार' तथा भगवान शिव द्वारा 'त्रिपुरासुर' वध का उत्सव मनाया जाता है। इसी महा-पुण्यकाल में 1469 ईस्वी में गुरु नानक जी का अवतरण क्षत्रिय (बेदी) परिवार में हुआ था। उन्होंने वेदों के सार—"एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति"—को सरल भाषा में "इक्क ओंकार" (ईश्वर एक है) के रूप में जन-जन तक पहुँचाया।
गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है?
इस महापर्व की तैयारियाँ कई दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। उत्सव मुख्य रूप से निम्नलिखित चरणों में संपन्न होता है:
1. प्रभात फेरी
गुरुपरब से लगभग एक सप्ताह पहले, सुबह के शुरुआती घंटों (अमृत वेला) में गुरुद्वारों से 'प्रभात फेरियाँ' निकाली जाती हैं। लोग भजनों और शबदों का कीर्तन करते हुए गलियों से गुजरते हैं।
2. अखंड पाठ
उत्सव के मुख्य दिन से ठीक 48 घंटे पहले (यानी 22 नवंबर से), गुरुद्वारों में पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' का निरंतर, बिना रुके पाठ शुरू किया जाता है, जिसे अखंड पाठ कहते हैं। इसका समापन 24 नवंबर की सुबह होता है।
3. नगर कीर्तन (जुलूस)
जायंती से एक दिन पहले (23 नवंबर को) एक विशाल जुलूस निकाला जाता है, जिसे 'नगर कीर्तन' कहते हैं। इसका नेतृत्व 'पंज प्यारे' (पाँच प्रिय) करते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब को सुंदर पालकी में सजाकर नगर में घुमाया जाता है। 'गटका' (पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन इसका मुख्य आकर्षण होता है।
इस दिन की मुख्य "पूजा विधि" और परंपराएं
24 नवंबर 2026 को श्रद्धालु बेहद सात्विक और भक्तिमय दिनचर्या का पालन करेंगे:
- अमृत वेला स्नान और ध्यान: भक्त सुबह जल्दी (लगभग 4 बजे) उठकर स्नान करते हैं। इस समय 'जपुजी साहिब' और 'आसा दी वार' का पाठ किया जाता है।
- गुरुद्वारा दर्शन और अरदास: लोग नए वस्त्र पहनकर भव्य रूप से सजे गुरुद्वारों में जाते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकने के बाद कथा, कीर्तन और सामूहिक 'अरदास' होती है।
- कड़ाह प्रसाद का वितरण: अरदास के बाद भक्तों को सूजी, घी और चीनी से बना बेहद पवित्र 'कड़ाह प्रसाद' दिया जाता है।
- लंगर सेवा: इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण 'लंगर' (सामूहिक भोज) है, जहाँ अमीर-गरीब, जाति-पाति का भेद भूलकर सभी लोग एक साथ जमीन पर बैठकर शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं।
- दीपमाला (रात का उत्सव): शाम को पूर्णिमा तिथि समाप्त होने से पहले और रात में गुरुद्वारों और घरों में दीपक व मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं, जो दीपावली जैसा मनमोहक दृश्य पैदा करती हैं।
गुरु नानक देव जी से जुड़ी प्रेरक कहानियाँ
गुरु नानक जी के जीवन की कहानियाँ आज भी मानवता को सही राह दिखाती हैं:
- सच्चा सौदा: जब पिता मेहता कालू जी ने व्यापार के लिए 20 रुपये दिए, तो नानक जी ने उन पैसों से भूखे साधुओं को भोजन करा दिया और कहा कि भूखों को भोजन कराने से बड़ा दुनिया में कोई 'सच्चा सौदा' नहीं हो सकता।
- मलिक भागो और भाई लालो: अमीर मलिक भागो के शाही पकवानों को छोड़कर नानक जी ने गरीब बढ़ई भाई लालो की सूखी रोटी चुनी। जब दोनों को दबाया गया, तो मलिक भागो के पकवान से खून (गरीबों के शोषण की कमाई) और भाई लालो की रोटी से दूध (ईमानदारी की कमाई) टपका।
- मक्का की यात्रा: मक्का में जब काजी ने काबा की तरफ पैर करके सोने पर आपत्ति जताई, तो नानक जी ने कहा,"मेरे पैर उस दिशा में घुमा दो जहाँ खुदा न हो।" काजी ने पैर घुमाया तो उसे हर दिशा में काबा नजर आया, जिससे सीख मिली कि ईश्वर कण-कण में है।
गुरु नानक देव जी के मुख्य तीन सिद्धांत
- कीरत करो: अपनी आजीविका पूरी ईमानदारी, लगन और मेहनत से कमानी चाहिए।
- नाम जपो: संसार के कार्य करते हुए भी हर समय ईश्वर को याद रखना चाहिए।
- वंड छको: अपनी कमाई का एक हिस्सा हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों में बाँटकर खाना चाहिए।
निष्कर्ष
गुरु नानक जयंती केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानवता, करुणा, सेवा और समानता का जीवंत उत्सव है। वर्ष 2026 में वृषभ राशि के चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में आने वाला यह 557वाँ प्रकाश पर्व हमें याद दिलाता है कि ईश्वर एक है। इस दिन गुरु नानक जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना ही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है।

