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गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा 2026: प्रकृति और भक्ति का दिव्य संगम

दीपावली के पावन पंचपर्व का तीसरा दिन गोवर्धन महाराज को समर्पित है। यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता और भगवान श्रीकृष्ण की शरणागति का उत्सव है। वर्ष 2026 में यह पर्व विशेष खगोलीय ऊर्जा के साथ आ रहा है।

शुभ तिथि और समय (2026)

इस वर्ष गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवम्बर 2026को मनाई जाएगी।

  • प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 06:40 बजे से 08:50 बजे तक।
  • पूजा की कुल अवधि: 02 घंटे 10 मिनट।
  • तिथि का विवरण:प्रतिपदा तिथि 09 नवम्बर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी और 10 नवम्बर को दोपहर 02:00 बजे समाप्त होगी।

ज्योतिषीय गणना और नक्षत्रों का प्रभाव

वर्ष 2026 की गोवर्धन पूजा के समय ग्रहों की स्थिति भक्तों के लिए आध्यात्मिक द्वार खोलने वाली होगी:

  • अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव: इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेगा और अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। यह नक्षत्र भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है, जो साधकों को मानसिक शांति प्रदान करेगा।
  • सूर्य और मंगल की युति: सूर्य तुला राशि में रहकर सामाजिक सौहार्द और संतुलन बनाएगा, जबकि मंगल का प्रभाव उत्सव में ऊर्जा, साहस और सक्रियता का संचार करेगा।

गोवर्धन पूजा की गौरवशाली कथा

यह कथा द्वापर युग की उस महान घटना की याद दिलाती है जब बालक कृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को चुनौती दी थी। ब्रजवासियों द्वारा इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने पर इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा की। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिनों तक पूरे ब्रज की रक्षा की। अंततः इंद्र का गर्व चूर हुआ और उन्होंने प्रभु से क्षमा मांगी। तभी से यह पर्व **'प्रकृति की विजय' के रूप में मनाया जाता है।

अन्नकूट: 56 भोग का महाप्रसाद

गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट का विशेष महत्व है। इसमें नई फसल के अनाज और विविध सब्जियों को मिलाकर एक महाप्रसाद तैयार किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि हमारी संपन्नता प्रकृति की देन है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन की भव्यता देखते ही बनती है।

पूजा विधि और सिद्ध मंत्र

इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और उसे फूलों व रंगों से सजाया जाता है।

पूजन सामग्री: थाली में रोली, चावल, बताशे, खीर, धूप-दीप और जल रखें।
मुख्य मंत्र: पूजा के समय इस मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी होता है:

“गोवर्धन धराधार गोकुल-त्राणकारक। विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥”
“ॐ नमः श्री वासुदेवाय, ॐ गोवर्धनाय नमः।”

वैज्ञानिक और आधुनिक महत्व

आज के दौर में यह पर्व 'सस्टेनेबल लिविंग' का प्राचीनतम उदाहरण है:

  • प्रकृति संरक्षण: यह हमें सिखाता है कि पहाड़, जल और वन ही हमारे जीवन के असली आधार हैं।
  • स्वास्थ्य: अन्नकूट में शामिल मौसमी सब्जियां रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाती हैं।
  • कृषि सम्मान: गोबर को उर्वरक के रूप में पूजना हमारी कृषि प्रधान संस्कृति और भूमि की उर्वरता के प्रति सम्मान प्रकट करता है।

 गिरिराज महाराज की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे!🚩

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