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धूमावती जयंती

धूमावती जयंती 2026: दस महाविद्या की सबसे रहस्यमयी शक्ति की साधना

हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में धूमावती जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन दस महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या, माता धूमावती के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। माता धूमावती "विधवा स्वरूप" और वैराग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो हमें सिखाती हैं कि संसार के दुखों और अभावों के पार ही परम सत्य छिपा है।

धूमावती जयन्ती 2026: तिथि और मुहूर्त

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी के मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • मुख्य तिथि: 22 जून, 2026 (सोमवार)
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 21 जून, 2026 को दोपहर 03:20 PM बजे से।
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 22 जून, 2026 को दोपहर 03:39 PM बजे तक।
  • विशेष: चूंकि माता धूमावती की पूजा सूर्योदय के समय (ब्रह्म मुहूर्त) में करने का विधान है, इसलिए 22 जून, सोमवार को ही मुख्य जयंती और अनुष्ठान संपन्न होंगे।

वर्ष 2026 की ज्योतिषीय गणना: ग्रह, नक्षत्र और योग

22 जून 2026 को बनने वाले ज्योतिषीय संयोग इस दिन को साधकों के लिए अत्यंत प्रभावशाली बना रहे हैं:

  1. नक्षत्र: इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके स्वामी सूर्य हैं। सूर्य की उपस्थिति आत्मा की शुद्धि और बाधाओं के नाश में सहायक होती है।
  2. वार संयोग: सोमवार का दिन होने के कारण यह माता पार्वती (धूमावती का मूल स्वरूप) और भगवान शिव की संयुक्त कृपा पाने का दिन है।
  3. शुभ योग: इस दिन सिद्धि योग और रवि योग का अद्भुत संगम बन रहा है। रवि योग सभी अनिष्टों को दूर करने वाला और सिद्धि योग कार्यों में सफलता सुनिश्चित करने वाला माना जाता है।
  4. चंद्र राशि: चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेंगे, जो बुध की राशि है। यह बौद्धिक शांति और तंत्र साधना की बारीकियों को समझने के लिए उत्तम स्थिति है।

माता धूमावती कौन हैं?

माता धूमावती का स्वरूप अन्य देवियों से बिल्कुल भिन्न है:

  • स्वरूप: वे वृद्ध, कांतिहीन और सफेद वस्त्र धारण किए हुए विधवा स्वरूप में दिखाई देती हैं। उनका वाहन कौआ है और उनके हाथ में सूप (छाज) होता है।
  • प्रतीक: वे विनाश के बाद शेष रहने वाली शक्ति हैं। वे हमें सिखाती हैं कि जीवन में दुख और एकांत भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

पौराणिक कथा: धूमावती का प्राकट्य

देवी धूमावती की कथा के अनुसार, जब माता पार्वती ने अपनी तीव्र भूख को शांत करने के लिए महादेव को ही निगल लिया, तब उनके शरीर से धुआं निकलने लगा। शिव जी ने उनके पेट से बाहर आकर कहा कि चूंकि तुमने अपने पति को निगल लिया है, इसलिए अब तुम विधवा स्वरूप में पूजी जाओगी और तुम्हारा नाम धूमावती होगा।

पूजा विधि: धूमावती जयंती पर क्या करें?

  • ब्रह्म मुहूर्त पूजन: सूर्योदय के समय पूजा करना सर्वश्रेष्ठ है। काले या सफेद वस्त्र धारण करें।
  • भोग: माँ धूमावती को नमक वाली चीजें (जैसे नमकीन पकोड़े) और काले तिल अर्पित किए जाते हैं।
  • दीपक: उनके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • मंत्र जाप: "ॐ धूँ धूँ धूँ धूमावती फट्" मंत्र का जाप शत्रुओं और ऋण (कर्ज) से मुक्ति दिलाता है।

विशेष सावधानियां और नियम

  • सुहागिन महिलाओं के लिए: शास्त्रों के अनुसार, सुहागिन महिलाओं को माता धूमावती की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए, वे केवल दूर से दर्शन करें।
  • मौन: इस दिन मौन रहना मानसिक शक्ति को बढ़ाता है।
  • दान: काले तिल, उड़द की दाल और काले वस्त्र का दान दरिद्रता को हर लेता है।

व्रत और पूजा का फल

22 जून 2026 को श्रद्धापूर्वक पूजा करने से बड़ी से बड़ी विपत्ति, कर्ज और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। साधक को निर्भयता और संसार की नश्वरता का ज्ञान प्राप्त होता है।

।। जय माँ धूमावती ।।

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