शारदीय नवरात्रि 2026: शक्ति साधना का महापर्व
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का वह पावन समय है जब आदिशक्ति माँ दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच वास करती हैं। वर्ष 2026 में यह उत्सव 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर तक चलेगा।
महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं शुभ मुहूर्त (2026)
- कलश स्थापना (घटस्थापना): 11 अक्टूबर 2026 (रविवार)
- स्थापना मुहूर्त: प्रातः 06:19 AM से 10:11 AM तक।
- अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 11:44 AM से 12:30 PM तक।
- महाअष्टमी (कन्या पूजन): 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
- महानवमी (हवन): 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
- विजयदशमी (दशहरा): 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
हम नवरात्रि क्यों मनाते हैं?
नवरात्रि मनाने के पीछे दो मुख्य पौराणिक कथाएँ हैं, जो अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देती हैं:
कथा १: महिषासुर मर्दिनी और माँ दुर्गा का युद्ध
महिषासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस था, जिसे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे नहीं मार पाएगा। इस अहंकार में उसने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से देवी दुर्गा प्रकट हुईं।माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच 9 दिनों तक भीषण युद्ध चला। अंततः 10वें दिन माँ ने महिषासुर का वध कर दिया। इन नौ दिनों की कठिन लड़ाई और विजय की खुशी में ही नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है।
कथा २: भगवान राम की 'अकाल बोधन' पूजा
रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करने और लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए युद्ध से पूर्व देवी दुर्गा की उपासना की थी। सामान्यतः देवी की पूजा वसंत (चैत्र) में होती थी, लेकिन राम जी ने संकट के समय अश्विन मास में देवी का आह्वान किया, जिसे 'अकाल बोधन' कहा जाता है। उन्होंने 9 दिनों तक कठिन तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर माँ ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। 10वें दिन राम जी ने रावण का वध किया, जिसे हम दशहरा के रूप में मनाते हैं।
नवदुर्गा: नौ स्वरूप और विस्तृत कथाएँ
1.प्रथम दिन: माँ शैलपुत्री (11 अक्टूबर)
- कथा: हिमालय (शैल) की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। पूर्व जन्म में ये राजा दक्ष की पुत्री 'सती' थीं। इन्होंने योगाग्नि में देह त्याग कर पुनः पार्वती के रूप में जन्म लिया।
- स्वरूप: वृषभ पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल।
- रंग: पीला।
- मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
2.दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी (12 अक्टूबर)
- कथा: भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्होंने हजारों वर्षों तक निराहार रहकर कठोर तपस्या (ब्रह्मचर्य) की। इसीलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। ये मोक्ष और संयम प्रदान करती हैं।
- रंग: सफेद/नारंगी।
- मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
3.तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा (13 अक्टूबर)
- कथा: भगवान शिव से विवाह के पश्चात माँ ने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, जो घंटे के समान दिखता है। इनकी भयानक ध्वनि से दुष्ट राक्षस कांपते हैं। ये वीरता और सौंदर्य का संगम हैं।
- रंग: सलेटी (Grey)।
- मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
4.चौथा दिन: माँ कुष्मांडा (14 अक्टूबर)
- कथा: जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। वे सूर्य लोक के भीतर निवास करने वाली एकमात्र शक्ति हैं।
- रंग: हरा।
- मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
5.पांचवा दिन: माँ स्कंदमाता (15 अक्टूबर)
- कथा: ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। तारकासुर के वध के लिए कार्तिकेय को तैयार करने वाली अदम्य शक्ति इन्हीं के भीतर समाहित है। ये ममता और युद्ध कौशल का प्रतीक हैं।
- रंग: नीला।
- मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
6.छठा दिन: माँ कात्यायनी (16 अक्टूबर)
- कथा: महर्षि कात्यायन की घोर तपस्या के बाद माँ ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया। इन्होंने ही महिषासुर का वध किया था, इसलिए इन्हें योद्धा देवी माना जाता है।
- रंग: लाल।
- मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
7.सातवां दिन: माँ कालरात्रि (17 अक्टूबर)
- कथा: असुर शुंभ-निशुंभ का नाश करने के लिए माँ ने यह अत्यंत भयानक रूप लिया। इनका वर्ण काला है और इनके श्वास से अग्नि निकलती है। ये काल का भी अंत करने वाली 'महाकालरात्रि' हैं।
- रंग: राजसी नीला।
- मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
8.आठवां दिन: माँ महागौरी (18/19 अक्टूबर)
- कथा: कठोर तप के कारण जब माँ का शरीर काला पड़ गया, तब शिव ने गंगाजल से उन्हें स्नान कराया, जिससे वे दूध जैसी सफेद हो गईं। ये शांति और शुद्धि की देवी हैं।
- रंग: गुलाबी।
- मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः।
9.नौवां दिन: माँ सिद्धिदात्री (20 अक्टूबर)
- कथा: ये सभी 8 प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं। भगवान शिव का 'अर्धनारीश्वर' रूप भी इन्हीं की कृपा से संभव हुआ था। ये आध्यात्मिक पूर्णता का आशीर्वाद देती हैं।
- रंग: बैंगनी।
- मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
2026 की ज्योतिषीय गणना एवं ग्रह स्थिति
- आगमन वाहन (हाथी): रविवार को नवरात्रि शुरू होने से माँ 'गज' पर आएंगी, जो समृद्धि का संकेत है।
- बुधादित्य योग: कन्या राशि में सूर्य और बुध की युति से बुद्धि और कौशल में वृद्धि होगी।
- नक्षत्र: घटस्थापना के समय चित्र नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, अतः अभिजित मुहूर्त का पालन विशेष रूप से करें।
वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य महत्व
ऋतु परिवर्तन (वर्षा से शरद) के समय संक्रामक रोगों का भय रहता है। नवरात्रि के 9 दिनों का व्रत पाचन तंत्र को साफ करता है, शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और ध्यान लगाने से मानसिक तनाव दूर होता है। यह पर्व तन, मन और आत्मा के कायाकल्प का अवसर है।
विजयदशमी (दशहरा): 21 अक्टूबर 2026
यह दिन अधर्म के अंत का प्रतीक है। रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले जलाकर हम अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और लालच को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।
🚩 माँ दुर्गा आपके जीवन में रिद्धि-सिद्धि और विजय लेकर आएं। जय माता दी! 🚩

