अनिरुद्ध चतुर्थी 2026: संकटमोचन और सुरक्षा का दिव्य महापर्व
अनिरुद्ध चतुर्थी हिंदू धर्म में, विशेष रूप से श्री अनिरुद्ध उपासना मार्ग में, एक अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली दिन माना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के 'चतुर्व्यूह' अवतारों में से एक, भगवान अनिरुद्ध की अजेय ऊर्जा और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है। 'अनिरुद्ध' का अर्थ है— "जिसे कोई रोक न सके"।
वर्ष 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में अनिरुद्ध चतुर्थी का पर्व भक्ति और शक्ति के अद्भुत संगम के साथ जुलाई के महीने में मनाया जाएगा।
- मुख्य तिथि: शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
- चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 17 जुलाई, 2026 को सुबह 06:27 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जुलाई, 2026 को सुबह 04:42 बजे
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक (अवधि: 2 घण्टे 45 मिनट्स)
- वर्जित चन्द्रदर्शन: इस दिन सुबह 08:37 बजे से रात 09:33 बजे तक चंद्र दर्शन वर्जित है।
नक्षत्र, ग्रह और ज्योतिषीय गणना
2026 की यह चतुर्थी शुक्रवार को पड़ रही है, जो सुख और ऐश्वर्य के कारक शुक्र देव का दिन है। इस दिन मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो पितृ पक्ष और राजसी शक्ति से जुड़ा माना जाता है। सिंह राशि में ग्रहों का संचरण इस दिन की पूजा को 'विजय' दिलाने वाली ऊर्जा से भर देगा।
पावन पौराणिक और दिव्य कथाएँ
बाणासुर का गर्व और अनिरुद्ध की वीरता
सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री उषा की है। उषा ने स्वप्न में अनिरुद्ध को देखा और उनसे प्रेम कर बैठी। उसकी सखी चित्रलेखा ने अपनी मायावी शक्ति से सोए हुए अनिरुद्ध को द्वारका से उठाकर बाणासुर के महल में पहुँचा दिया। बाणासुर ने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया, जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और प्रद्युम्न ने विशाल युद्ध कर अनिरुद्ध को मुक्त कराया। यह कथा सिखाती है कि जब ईश्वर रक्षक हों, तो कोई भी बंधन स्थायी नहीं होता।
मन के अधिष्ठाता देव
शास्त्रों के अनुसार, भगवान अनिरुद्ध को'मन' का देवता माना जाता है। जैसे मन की गति को कोई रोक नहीं सकता, वैसे ही भगवान अनिरुद्ध की शक्ति अजेय है। उनकी कृपा से चंचल मन शांत होता है और मानसिक एकाग्रता प्राप्त होती है।
सम्पूर्ण पूजन विधि
1. पवित्रता: 17 जुलाई की सुबह स्नानादि के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
2. स्थापना: मध्याह्न मुहूर्त (11:05 AM से 01:50 PM) के दौरान एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान अनिरुद्ध और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
3. कलश और दीप: उनके समक्ष जल से भरा कलश रखें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। चमेली या केवड़े की सुगंध का प्रयोग करें।
4. अर्पण: भगवान को चंदन का तिलक लगाएं और पीले पुष्प व तुलसी दल अर्पित करें।
5. विशेष पाठ: इस दिन'घोरकष्टोद्धारण स्तोत्र' का पाठ करना अनिवार्य है। यह स्तोत्र जीवन के कठिन समय में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
6. क्षमा प्रार्थना: अंत में प्रार्थना करें— "हे प्रभु, मेरे अहंकार को दूर करें और मुझे अपनी शरण में रखें।"
भोग और नैवेद्य
चूंकि यह चतुर्थी है, इसलिए भगवान को मोदक और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही, दूध से बनी सफेद खीर और मौसमी फलों (विशेषकर आम या केला) का नैवेद्य अर्पित करना अत्यंत शुभ है।
इस दिन के विशिष्ट लाभ
- सुरक्षा कवच: इस वर्ष की विशिष्ट ग्रह स्थिति के कारण, पूजा करने वाले भक्तों को एक अदृश्य दैवीय सुरक्षा प्राप्त होती है।
- मानसिक शांति: क्योंकि अनिरुद्ध मन के स्वामी हैं, उनकी पूजा से तनाव और मानसिक अस्थिरता दूर होती है।
- बाधा निवारण: यदि आपका कोई कार्य लंबे समय से अटका हुआ है, तो मध्याह्न मुहूर्त में की गई प्रार्थना उसे गति प्रदान करती है।
भगवान अनिरुद्ध का दिव्य स्वरूप
ध्यान के लिए उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य है। वे नील वर्ण के हैं, उनके चार हाथ हैं जिनमें वे शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। उनकी मंद मुस्कान भक्त के हृदय में यह विश्वास पैदा करती है कि "मेरा ईश्वर मेरे साथ है।"
निष्कर्ष:
अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (17 जुलाई) ईश्वर के साथ अपने संबंध को गहरा करने का महापर्व है। यह दिन हमें सिखाता है कि जब हम अपनी समस्याओं को भगवान अनिरुद्ध के चरणों में छोड़ देते हैं, तो वे हमारी नैया को हर तूफान से बाहर निकाल लेते हैं।
विशेष सावधानी: 2026 में वर्जित चंद्रदर्शन के समय (सुबह 08:37 से रात 09:33) का ध्यान रखें और इस दौरान चंद्रमा के दर्शन से बचें।

