रामनवमी

रामनवमी का त्यौहार चैत्र मॉस के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार जन जन के आराध्य भगवान श्री राम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। राम नवमी तिथि पर दोपहर के समय भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजे जाने वाले श्री राम के बिना सनातन संस्कृति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस तिथि पर जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की नौवीं शक्ति मां सिद्धिदात्री की भी पूजा की जाती है।

Puja starts from ₹501.00

Puja Duration: 1 hour

Culture/Rituals: Hindi

 

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भगवान श्री राम के जन्म के उद्देश्य के पीछे एक पौराणिक घटना है । वह घटना लंका के राजा रावण के वध की है। भगवान श्रीहरि विष्णु लंकापति रावण के सर्वनाश के लिए त्रेतायुग में प्रभु राम का अवतार लेकर पृथ्वी पर आए थे। भगवान राम अपने अनुकरणीय गुणों के लिए जाने जाते थे। वे लोकप्रिय, बहादुर, दयालु, न्यायप्रिय, बुद्धिमान, धैर्यवान, प्रेमपूर्ण, आज्ञाकारी और कर्तव्यपरायण थे। भगवान राम को हमेशा उनकी पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण और भक्त हनुमान के साथ पूजा जाता है।

राम नवमी को बहुत शुभ दिवस माना जाता है। महाकवि तुलसीदास ने इसी दिन महाग्रंथ राम चरित मानस की रचना प्रारंभ की। राम नवमी के दिन को भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में बड़ी ही श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाते हैं। इस दिन लोग घरों में प्रभु राम की व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान राम अपने भक्तों को अपनी कृपा से तार देते हैं।

पूजन विधि

राम नवमी के दिवस ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान के बाद सूर्य देवता को तांबे के लोटे से अर्घ्य देने के बाद श्री राम और श्रीरामचरितमानस के पूजन का विधान है। पूजन के लिए पूजा स्थल को साफ़ कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। श्री राम की मूर्ति स्थापित कर श्री राम दरबार की तस्वीर लगाएं। गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर उनका पूजन करे। इसके बाद श्री राम को पीले रंग के फूल चढ़ाएं,चंदन, कुमकुम, सिंदूर, आदि चढ़ाए। फूलों की माला पहनाएं। तुलसी जल चढ़ा भोग लगाएं। श्री रामचरितमानस का पाठ करें। सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करें। हवन करें आरती करें। भगवान राम के सामने हाथ जोड़कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति की मनोकामना करें।

Puja Samagri List

Yajman Samagri (यजमान के द्वारा की जाने वाली सामग्री)
  • दूध 250 ग्राम
  • दही 200 ग्राम
  • घी 200 ग्राम
  • शक्कर 500 ग्राम
  • समी पत्ते 11 पत्ते
  • आम पत्ते 10 पत्ते
  • केले पत्ते 5 पत्ते
  • बेल पत्ते 21 पत्ते
  • पान पत्ते 5 पत्ते
  • फूल + माला 2 माला
  • मिठाई 500 ग्राम
  • फल 1 किलो
  • थाली 2 नग
  • कटोरी 5 कटोरी
  • ताँबे के लोटे 2 नग
  • दुब
  • लकड़ी का पटा 1 नग
Other Samagri (अन्य सामग्री)
  • अबीर 10 रु
  • गुलाल 10 रु
  • रोली 10 रु
  • सिंदूर 10 रु
  • अष्टगंद 15 रु
  • हल्दी 15 रु
  • गोल सुपारी 100 ग्राम
  • जनेऊ 5 नग
  • रक्क्षा सूत्र 1 नग
  • नारियल 2 नग
  • इत्र 1 शीशी
  • कपूर 100 ग्राम
  • लाल कपडा 1 मीटर
  • सफेद कपडा 1 मीटर
  • चावल 100 ग्राम
  • अगरबत्ती 1 पैकेट
  • धुप बत्ती 1 पैकेट
  • फूल बत्ती 1 पैकेट
  • सहद 10 रु
  • पंचमेवा 1 पैकेट
  • गंगाजल 1 शीशी
  • माचिस 1 नग
  • दीपक/दिया 3 नग
  • लौंग 10 रु
  • इलायची 10 रु
  • गोबर कण्डे 2 नग
  • लोभन 50 ग्राम
  • गूगल 25 ग्राम

Additional Information

श्री राम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। वह अवतारी पुरुष थे, लेकिन उन्होंने सांसारिक प्रक्रिया के तहत अपनी मां की कोख से जन्म लिया था। दरअसल राजा दशरथ के कोई पुत्र नहीं थे। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र यज्ञ करने का फैसला किया। दशरथ ने श्रृंगी ऋषि सहित कई महान ऋषियों तपस्या विद्वानों को यज्ञ में निमंत्रित किया। फिर गुरु वशिष्ठ और श्रृंगी ऋषि के नेतृत्व में यज्ञ शुरू किया। वैदिक विधि से यज्ञ के संपन्न होने के बाद प्रसाद के रूप में मिली खीर को अपनी तीनों पत्नियों कौशल्या, सुमित्रा और कैकई को दिया। प्रसाद के फल स्वरुप रानी कौशल्या ने श्री राम को जन्म दिया। श्री राम इतने के चेहरे पर इतना तेज और आकर्षण था, जिस व्यक्ति ने भी उसे देखा वह देखते ही रह गया।

सनातन धर्म के आराध्य, पुरुषार्थ के प्रतीक, भगवान राम के चरित्र से कई गुण ऐसे हैं, जिन्हें सीख कर आप अपना जीवन सफल बना सकते हैं। पिता और गुरुजन की हर आज्ञा का पालन करना श्रीराम का सबसे महत्वपूर्ण गुण है। 14 साल तक वनवास काटने के बाद भी उन्होंने मर्यादा, दया, सत्य, करुणा और धर्म जैसे आचरण को नहीं त्यागा, जिसके कारण वे श्रेष्ठ राजा कहलाए। भगवान राम के गुणों में सबसे अहम गुण है, धैर्यवान या सहनशील होना। किसी भी चीज को जल्द ही पाने की ललक हर बार काम बिगाड़ सकती है। अगर आपके अंदर धैर्य और सहनशीलता है आ जाए तो यह आपको सफल बना सकता है। भगवान राम की तरह प्रत्येक व्यक्ति में मानव और पशु के लिए दयालुता का भाव होना चाहिए।