गणेश चतुर्थी (गणेशपूजन 10 दिन)
गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल की चतुर्थी से देशभर में गणेश चतुर्थी पर्व का शुभारंभ हो जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और 9 दिन तक उनकी पूजा की जाती है। 10वें दिन भक्ति भाव के साथ गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। 10 दिनों तक भगवान गणेश की पूजा करने से भक्त को सभी दुखों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
Starts From ₹1501.00
Puja Booking Price ₹101.00
Puja Duration: 30 mins
Culture/Rituals: Hindi
Puja Samagri: View Samagri List
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पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणपति जी से महाभारत की रचना को क्रमबद्ध करने की प्रार्थना की थी. गणेश चतुर्थी के ही दिन व्यास जी श्लोक बोलते गए और गणेश जी उसे लिखित रूप में करते गए. 10 दिनों तक लगातार लेखन करने के बाद गणेश जी पर धूल-मिट्टी की परतें चढ़ गई थी और उनका तापमान बढ़ गया. तब वेद व्यास जी ने गणेश जी को सरस्वती नदी के ठंडे पानी से स्नान कराके धूल-मिट्टी को साफ किया. तब से गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और 9 दिन तक उनकी पूजा की जाती है। 10वें दिन भक्ति भाव के साथ गणेश जी का विसर्जन किया जाता है।
गणेश चतुर्थी पूजन महत्व
भगवान गणेश को सौभाग्य, समृद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। ऐसे में गणेश पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही मान्यता है कि गणेश उत्सव के 10 दिनों तक भगवान गणेश धरती पर रहते हैं और अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं। इस दिन घरों में भगवान गणेश की मूर्ति का भव्य स्वागत किया जाता है। इसके साथ ही गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाता है। इस तिथि पर व्रत रखने से व्रती को जीवन में सुख-समृद्धि और कई लाभ मिलते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणपति जी से महाभारत की रचना को क्रमबद्ध करने की प्रार्थना की थी. गणेश चतुर्थी के ही दिन व्यास जी श्लोक बोलते गए और गणेश जी उसे लिखित रूप में करते गए. 10 दिनों तक लगातार लेखन करने के बाद गणेश जी पर धूल-मिट्टी की परतें चढ़ गई थी और उनका तापमान बढ़ गया. तब वेद व्यास जी ने गणेश जी को सरस्वती नदी के ठंडे पानी से स्नान कराके धूल-मिट्टी को साफ किया. तब से गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापित की जाती है और 9 दिन तक उनकी पूजा की जाती है। 10वें दिन भक्ति भाव के साथ गणेश जी का विसर्जन किया जाता है।
गणेश चतुर्थी पूजन विधि
1. पहला दिन (गणेश चतुर्थी)
गणेश प्रतिमा की स्थापना: इस दिन गणेश जी की प्रतिमा घर या मंदिर में स्थापित की जाती है।
मंत्रोच्चारण: "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें।
घर में पूजा का स्थान साफ और सुंदर रखें।
2. दूसरा से आठवां दिन (सप्ताहभर पूजा)
नियमित पूजा: प्रत्येक दिन गणेश जी की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
मंत्र: "ॐ श्री गणेशाय नमः" और "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें।
भोग: हर दिन मोदक, लड्डू, फल और अन्य पकवानों का भोग लगाएं।
आरती: दिन में दो बार गणेश जी की आरती करें (सुबह और शाम)।
स्नान और व्रत: संतान सुख, धन, स्वास्थ्य की कामना के लिए व्रत रखें।
3. नौवां दिन (आनंद वर्धन पूजा)
इस दिन विशेष पूजा होती है, और गणेश जी के पास होने पर उनका ध्यान करते हुए प्रार्थना करें।
आरती: इस दिन अधिक श्रद्धा और भाव के साथ आरती करें।
4. दसवां दिन (अनंत चतुर्दशी)
विसर्जन: दसवें दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसे 'गणेश विसर्जन' या 'गणपति बप्पा मोरया' कहते हैं।
इस दिन परिवार के सभी सदस्य एकजुट होकर गणेश जी के विसर्जन के लिए निकलते हैं। कुछ लोग संगीत और नृत्य के साथ गणेश जी की मूर्ति लेकर नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन करते हैं।
प्रार्थना: विसर्जन से पहले "ॐ गणेशाय नमः" का जाप करके गणेश जी से आशीर्वाद लें और उन्हें विदाई दें।
विशेष ध्यान रखने योग्य बातें:
- व्रत और उपवास: कुछ लोग इस अवधि में उपवास रखते हैं और केवल शुद्ध आहार ग्रहण करते हैं।
- साफ सफाई: पूजा स्थल को हमेशा स्वच्छ और पवित्र रखें।
- मोदक का भोग: गणेश जी का प्रिय भोग मोदक होता है, इसलिए इस दिन खास तौर पर मोदक बनाना चाहिए।
- संतुष्टि और श्रद्धा: पूजा में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भाग लें।
- गणेश पूजा को पूरे मन और श्रद्धा से 10 दिनों तक मनाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
Puja Samagri List
गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति 1
अबीर 10 रु
गुलाल 10 रु
रोली 10 रु
सिंदूर 15 रु
हल्दी 15 रु
गोल सुपारी 100 ग्राम
खरक 50 ग्राम
बादाम 50 ग्राम
हल्दी की गाठें 50 ग्राम
जनेऊ 5 नग
रक्क्षा सूत्र 1 नग
नारियाल 2 नग
इत्र 1 शीशी
कपूर 100 ग्राम
लाल कपडा 1 मीटर
सफेद कपडा 1 मीटर
गेहू 1 किलो
चावल 1 किलो
अगरबत्ती 1 पैकेट
धुप बत्ती 1 पैकेट
फूल बत्ती 1 पैकेट
शहद 10 रु
गंगाजल 1 पैकेट
हवन समाग्री 500 ग्राम
हवन लकड़ी 4 पैकेट
नवग्रह लकड़ी 1 पैकेट
नारियल गोला 1 गोला
माचिस 1 नग
दीपक /दिया 3 नग
लौंग 10 रु
इलाइची 10 रु
दूध 250 ग्राम
दही 250 ग्राम
घी 200 ग्राम
शक्कर 500 ग्राम
आम पत्ते 10 पत्ते
केले पत्ते 5 पत्ते
बेल पत्ते 21 पत्ते
समी पत्ते 11 पत्ते
पान पत्ते 5 पत्ते
फूल + माला 2 माला
मिठाई 500 ग्राम
फल 1 किलो
थाली 2 नग
कटोरी 7 कटोरी
ताँबे के लोटे 2 नग
दुब
हवन कुंड 1 नग
लकड़ी का पटा 1 नग
Additional Information
पौराणिक कथा
स्नान करते समय पार्वती ने अपने शरीर से निकले मैल से भगवान गणेश की रचना की। पार्वती ने विनायक को आदेश दिया कि वह दरवाजे पर खड़े रहें और किसी को भी अंदर न आने दें। इस बीच, भगवान शिव घर लौट आए और परिसर में प्रवेश करना चाहते थे। हालाँकि, भगवान गणेश ने उन्हें रोक दिया, जिससे वे क्रोधित हो गए। इस प्रकार, भगवान शिव ने गणेश का सिर काट दिया।
जब देवी पार्वती को यह सच्चाई पता चली, तो उनका दिल टूट गया। भगवान शिव ने भगवान गणेश को वापस जीवित करने की कसम खाई। उन्होंने अपने शिष्यों को निर्देश दिया कि वे सबसे पहले जिस भी जीवित प्राणी को देखें, उसका सिर ढूंढें ताकि वे उसे भगवान गणेश के शरीर पर लगा सकें। उनके भक्त एक शिशु हाथी का सिर लेकर आए, जिसे गणेश के सिर पर लगाया गया, ताकि उन्हें वापस जीवित किया जा सके। इस घटना के बाद, भगवान शिव ने भगवान गणेश को "गणपति - गणों का नेता" नाम दिया।
