दिवाली एवं महालक्ष्मी पूजन

दीपावली का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जा रही है। साथ ही धन के देवता कुबेर देव की भी उपासना की जा रही है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि चिरकाल में समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या तिथि पर मां लक्ष्मी अवतरित हुई थीं। इस उपलक्ष्य पर हर वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन दीवाली मनाई जाती है। वहीं, त्रेता युग में भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास के बाद घर लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर दीवाली मनाई थी। तत्कालीन समय से हर वर्ष दीवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही दीप जलाए जाते हैं। धार्मिक मत है कि मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

Puja starts from ₹501.00

Puja Duration: 1 hour

Culture/Rituals: Hindi

 

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देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णुपूजन और महत्व

धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पत्नी अपने भक्तों से मिलने आती हैं और उन्हें सौभाग्य और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। देवी का स्वागत करने के लिए, भक्त अपने गृहस्थानो को साफ और सजावटी वस्तुओं से रोशन करते हैं एवम प्रसाद के रूप में स्वादिष्ट व्यंजन चढ़ाते हैं।

इस अवसर पर यह माना जाता है कि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और ऐसे घरों की तलाश करती हैं जहां उनका स्वागत हो और फिर उस घर में प्रवेश कर समृद्धि और सौभाग्य फैलाती हैं।दिवाली के दिन लक्ष्मी और गणेश के साथ-साथ कुबेर, सरस्वती और काली माता की पूजा का भी प्रावधान है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा के बिना केवल देवी लक्ष्मी की पूजा सफल नहीं होती और अगर पूजा अधूरी रह जाए तो पूजा का कोई लाभ नहीं मिलता। इसलिए पूजा करते समय देवी लक्ष्मी की मूर्ति हमेशा भगवान विष्णु के बाईं ओर होनी चाहिए।

लक्ष्मील-गणेश पूजन विधि

सबसे पहले पूजा का संकल्प लें फिर कुश के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति इस प्रकार रखें कि गणेश जी लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर हों और उनका मुख पूर्व दिशा की ओर हो। मूर्तियों के सामने चावल पर कलश स्थापित करें। कलश पर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल रखें। फिर मूर्तियों के सामने दो बड़े दीपक जलाएं। एक घी का और दूसरा तेल का दीपक रखें। एक दीपक मूर्तियों के चरणों में और दूसरा स्टैंड के दाहिनी ओर रखें। पूजा के लिए जल, मौली, अबीर, चंदन, गुलाल, चावल, धूपबत्ती, गुड़, फूल, नैवेद्य आदि लेकर आएं। सबसे पहले गणेश जी और फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें।भगवान गणेश को पीले फूलों की माला और देवी लक्ष्मी को कमल गट्टे की माला चढ़ाएं। फिर पूजा के बाद आरती करें। व्यापारी वर्ग बहीखाते की पूजा करें और फिर नया लेखन शुरू करें। तेल के कई दीपक जलाएं और उन्हें घर के हर कमरे, तिजोरी, आंगन और गैलरी के पास रखें। मिश्री, पकवान और खीर आदि का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।

Puja Samagri List

Home Samagri (यजमान के द्वारा की जाने वाली सामग्री)

दूध 250 ग्राम

आम पत्ते 10 पत्ते

केले पत्ते 5 पत्ते

बेल पत्ते 21 पत्ते

समी पत्ते 11 पत्ते

पान पत्ते 5 पत्ते

फूल + माला 2 माला

मिठाई 500 ग्राम

फल 1 किलो

थाली 2 नग

कटोरी 7 कटोरी

ताँबे के लोटे 2 नग

हवन कुंड 1 नग

लकड़ी का पटा 1 नग

कमल फूल 5 नग

Other Samagri (अन्य सामग्री)

अबीर 10 रु

गुलाल 10 रु

रोली 10 रु

सिंदूर 10 रु

अष्टगंद 15 रु

हल्दी 15 रु

गोल सुपारी 100 ग्राम

खरक 50 ग्राम

बादाम 50 ग्राम

हल्दी की घाटे 50 ग्राम

जनेऊ 5 नग

रक्क्षा सूत्र 1 नग

नारियल 2 नग

इत्र 1 शीशी

कपूर 100 ग्राम

लाल कपडा 1 मीटर

सफेद कपडा 1 मीटर

गेहू 1 किलो

चावल 1 किलो

अगरबत्ती 1 पैकेट

धुप बत्ती 1 पैकेट

फूल बत्ती 1 पैकेट

दही 250 ग्राम

घी 200 ग्राम

सहद 10 रु

शक्कर 500 ग्राम

गंगाजल 1 शीशी

पंचमेवा 1 पैकेट

हवन समाग्री 500 ग्राम

हवन लकड़ी 4 पैकेट

नवग्रह लकड़ी 1 पैकेट

नारियल गोला 1 गोला

माचिस 1 नग

दुब

दीपक/ दिया 3 नग

लौंग 10 रु

इलायची 10 रु

मखाने 50 ग्राम

मोर पॅंख 5 नग

कमल गट्टे 50 ग्राम

सिंगाडा 100 ग्राम

Additional Information

दिवाली पूजन मंत्र :-

  • ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम।।
  • ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा।।
  • ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
  • धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पद।।
  • ऊं गं गणपतये नम।।