वरदा चतुर्थी 2026: भगवान गणेश के आशीर्वाद का महापर्व
वरदा चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायी दिन माना जाता है। वैसे तो हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वरदा चतुर्थी कहते हैं, लेकिन जून 2026 की यह चतुर्थी विशेष संयोगों के साथ आ रही है। 'वरदा' का अर्थ है वह जो प्रार्थना सुनकर मनचाहा 'वरदान' प्रदान करे।
वरदा चतुर्थी जून 2026: शुभ मुहूर्त और समय
इस वर्ष जून माह में वरदा चतुर्थी 25 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार का दिन भगवान शिव का है और चतुर्थी गणेश जी की, अतः यह 'शिव-पुत्र' संयोग भक्ति के लिए उत्तम है।
- चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 25 जून, 2026 को सुबह 09:22 AM बजे से।
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 26 जून, 2026 को सुबह 06:58 AM बजे तक।
- चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:14 AM से दोपहर 02:02 PM तक।
- वर्जित चन्द्रदर्शन (चंद्रमा न देखने का समय): सुबह 08:39 AM से रात्रि 09:57 PM तक। (इस दौरान चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगने का भय रहता है)।
ज्योतिषीय गणना: ग्रह, नक्षत्र और संयोग
25 जून 2026 को बनने वाली खगोलीय स्थिति भक्तों के लिए अत्यंत ऊर्जावान है:
- वार: सोमवार होने के कारण इस दिन "सोम-चतुर्थी" का योग बन रहा है, जो मानसिक शांति और पारिवारिक सुख के लिए श्रेष्ठ है।
- नक्षत्र: इस दिन स्वाति नक्षत्र रहने की संभावना है, जिसके स्वामी राहु हैं। गणेश जी की पूजा राहु के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में अचूक मानी जाती है।
- चंद्र राशि: चंद्रमा इस दिन तुला राशि में संचरण करेंगे, जो संतुलन और न्याय का प्रतीक है।
- मध्याह्न पूजा: गणेश जी की पूजा दोपहर (मध्याह्न) में करने का विधान है, जो इस बार 2 घंटे 48 मिनट की विशेष अवधि के लिए उपलब्ध है।
पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाएँ
वरदा चतुर्थी का महत्व इन कथाओं के बिना अधूरा है:
- भगवान गणेश का प्राकट्य: माता पार्वती द्वारा निर्मित बालक में जब शिव जी ने प्राण फूँके और उन्हें गजानन रूप दिया, तब वे सभी गणों के स्वामी कहलाए। यह दिन उनके उसी तेजस्वी स्वरूप की आराधना का है।
- चंद्रमा के अहंकार का नाश: पौराणिक कथा के अनुसार, इसी तिथि को गणेश जी ने चंद्रमा को उनके रूप पर गर्व करने के कारण श्राप दिया था। इसीलिए आज भी इस दिन वर्जित समय (08:39 AM से 09:57 PM) के बीच चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है ताकि 'मिथ्या दोष' से बचा जा सके।
- बाधाओं का निवारण: 'विनायक' का अर्थ ही है बाधाओं को दूर करने वाला। इस दिन भक्त अपने नए कार्यों की शुरुआत के लिए गणेश जी का आशीर्वाद लेते हैं।
पूजा विधि और अनुष्ठान (2026 विशेष)
- स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- मध्याह्न पूजा: दोपहर 11:14 AM से 02:02 PM के बीच गणेश जी को सिंदूर, लाल फूल और दूर्वा चढ़ाएं।
- विशेष भोग: गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। सोमवार का दिन होने के कारण सफ़ेद वस्तुओं जैसे दूध से बनी मिठाई का दान करना भी शुभ होगा।
- मंत्र जाप: "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
आध्यात्मिक महत्व
वरदा चतुर्थी हमें सिखाती है कि बुद्धि और धैर्य के साथ किसी भी संकट का समाधान निकाला जा सकता है। जून 2026 की यह चतुर्थी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो अपने जीवन में नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। भगवान गणेश की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
।। गणपति बप्पा मोरया ।।

