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वैशाख मासिक शिवरात्रि

वैशाख मासिक शिवरात्रि 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय संयोग

हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा अर्चना करने से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है।

तिथि और पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त (2026)

वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि और पूजा के समय की गणना इस प्रकार है:

  • वैशाख कृष्ण चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 अप्रैल 2026, दोपहर 12:45 बजे से।
  • वैशाख कृष्ण चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 अप्रैल 2026, सुबह 10:12 बजे तक।
  • निशिता काल (प्रधान पूजा मुहूर्त): 11:59 पी एम से 12:43 ए एम (16 अप्रैल) तक।
  • विशेष: शिवरात्रि की मुख्य पूजा मध्यरात्रि यानी निशिता काल में ही की जाती है, क्योंकि इसी समय शिव-शक्ति का मिलन ब्रह्मांड में ऊर्जा के रूप में व्याप्त होता है।

नक्षत्र और शुभ योगों का संगम

इस वर्ष की शिवरात्रि पर ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है:

  • चित्रा नक्षत्र: इस दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे वैभव और सृजन का नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र में शिव आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • ब्रह्म योग: पूजा के समय ब्रह्म योग का प्रभाव रहेगा, जो मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • इन्द्र योग: यह योग राजकीय कार्यों, मान-प्रतिष्ठा और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला माना गया है।

पूजन विधि और चार प्रहर का विधान

वैशाख की गर्मी को देखते हुए इस दिन शिवलिंग पर शीतल द्रव्यों का अर्पण विशेष महत्व रखता है।

  • अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चे दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र अर्पण: 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए 11 या 21 बेलपत्र अर्पित करें।
  • रात्रि जागरण: निशिता काल (11:59 PM - 12:43 AM) के दौरान शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना अनंत गुना फल देता है।

व्रत कथा का सार और महत्व

प्राचीन कथा के अनुसार, चित्रभानु नामक शिकारी ने अनजाने में ही सही, लेकिन शिवरात्रि के दिन चार प्रहर तक शिवलिंग पर बेलपत्र और जल अर्पित किया था। निशिता काल में की गई उसकी अनजानी पूजा से प्रसन्न होकर महादेव ने उसे मोक्ष प्रदान किया।

धार्मिक फल:

  • इस व्रत को करने से व्यक्ति की नकारात्मकता का नाश होता है।
  • वैशाख मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने से पितृ दोष और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है।
  • बुधवार के दिन शिवरात्रि होने से यह विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए विशेष लाभकारी है।

व्रत का पारण 

व्रत का सफल समापन अगले दिन सूर्योदय के पश्चात किया जाता है।

पारण समय: 16 अप्रैल 2026 को सुबह 06:14 बजे के बाद (सूर्योदय उपरांत)।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

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