Online Puja & Pandit Booking
+91 91115 12346

पार्वती जयंती

माता पार्वती, जो शक्ति, प्रेम, धैर्य और गृहस्थ जीवन की अधिष्ठात्री देवी हैं, उनका प्राकट्य उत्सव 'पार्वती जयंती' के रूप में पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व नारी शक्ति और अटूट संकल्प का प्रतीक है।

पार्वती जयंती: शक्ति और संकल्प का महापर्व

पार्वती जयंती वह पावन दिन है जब माता आदि-शक्ति ने हिमालय राज और माता मैना के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। सती के आत्मदाह के बाद, महादेव को पुनः गृहस्थ जीवन में लाने और तारकासुर जैसे भयंकर असुर का संहार करने के लिए माता ने 'पार्वती' के रूप में पुनर्जन्म लिया।यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का दिन माना जाता है।

यह कब मनाई जाती है? 

पार्वती जयंती प्रतिवर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।इसे कई क्षेत्रों में 'फुलैरा दूज' के आसपास मनाया जाता है।यह समय बसंत ऋतु के आगमन का होता है, जो प्रकृति में नए सृजन और प्रेम का प्रतीक है।

पौराणिक कथा: तपस्या से परमेश्वर तक का सफर

माता पार्वती के जन्म और विवाह से जुड़ी कथा अत्यंत प्रेरणादायक है:

कठोर तपस्या की कहानी:
जन्म के बाद जब पार्वती बड़ी हुईं, तो देवर्षि नारद ने उनके पिता हिमालय को बताया कि इनकी नियति महादेव से जुड़ी है। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पार्वती ने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया और केवल बेलपत्र खाकर जीवित रहीं (जिस कारण उन्हें 'अपर्णा' कहा गया)। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें दर्शन दिए और फाल्गुन मास में ही उनके विवाह की नींव पड़ी।

तारकासुर वध की भूमिका:
ब्रह्मा जी के वरदान के अनुसार तारकासुर का वध केवल शिव-पार्वती का पुत्र ही कर सकता था। अतः पार्वती का जन्म ब्रह्मांड के संतुलन और धर्म की स्थापना के लिए अनिवार्य था।

सम्पूर्ण पूजन विधि

इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा का विधान है:

1.ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें (लाल रंग माता पार्वती को अत्यंत प्रिय है)।
2.वेदी स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3.श्रृंगार अर्पण: माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। इसमें **सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी, मेंहदी, और लाल चुनरी शामिल होनी चाहिए।
4.महादेव का पूजन: भगवान शिव को चंदन, भस्म और बेलपत्र चढ़ाएं।
5.दीपक और मंत्र: घी का दीपक जलाएं और माता पार्वती के मंत्र का जाप करें:
"ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः" या "ॐ पार्वत्यै नमः"
6.पार्वती चालीसा: इस दिन पार्वती चालीसा और शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

विशेष भोग और प्रसाद

माता पार्वती को गृहस्थी की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें घर में बना शुद्ध सात्विक भोजन प्रिय है:

  • हलवा और पूरी: यह उनका मुख्य प्रसाद माना जाता है।
  • खीर: दूध और चावल की सफेद खीर का भोग लगाया जाता है।
  • ऋतु फल: मौसमी फल और मिठाइयाँ अर्पित की जाती हैं।

इस दिन हम क्या विशेष करते हैं?

  1. सुहाग दान: विवाहित महिलाएं अपना पूजा किया हुआ सिंदूर और सुहाग का सामान अन्य सौभाग्यवती महिलाओं को दान करती हैं। माना जाता है कि इससे पति की आयु लंबी होती है।
  2. कन्या पूजन: छोटी कन्याओं को माता पार्वती का स्वरूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं।
  3. कथा श्रवण: महिलाएं एकत्रित होकर माँ पार्वती की तपस्या की कथा सुनती हैं।
  4. कीर्तन: रात्रि में 'शिव-पार्वती विवाह' के गीत और भजन गाए जाते हैं।

पार्वती जयंती के आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ

  • अखंड सौभाग्य: सुहागिन महिलाओं को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
  • शीघ्र विवाह: कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।
  • संकल्प शक्ति: माता पार्वती की कथा हमें सिखाती है कि यदि हमारा संकल्प दृढ़ हो, तो हम ईश्वर को भी प्राप्त कर सकते हैं।
  • संतान सुख: जो दंपत्ति संतान की कामना रखते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी है।

माता पार्वती का दिव्य स्वरूप

माता पार्वती को करुणामयी मां, ममता की प्रतिमूर्ति और साथ ही 'दुर्गा' के रूप में शक्ति का पुंज माना जाता है। उनका स्वरूप हमें सिखाता है कि एक स्त्री घर को संभालते समय कोमल हो सकती है, लेकिन धर्म की रक्षा के समय वह पर्वत की तरह अडिग भी हो सकती है।

निष्कर्ष:

पार्वती जयंती केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि धैर्य और अटूट प्रेम का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। जो कोई भी इस दिन श्रद्धा भाव से माँ की शरण में आता है, माता उसके जीवन की समस्त बाधाओं को पार लगा देती हैं।

For Customer
Login Register
Join as Partner

Become Pandit, Agent or Associate
Click below button to register or login

Join as Partner

For any query call us:

+91 9111512346
Your Cart

Your cart is currently empty.
Let us help you find the perfect item!