ओणम: खुशहाली, प्रचुरता और राजा महाबली के स्वागत का महापर्व
ओणम मुख्य रूप से एक फसल उत्सव (हार्वेस्ट फेस्टिवल) है जो नए सीजन की शुरुआत और प्रचुर फसल के आने की खुशी में मनाया जाता है। केरल वासियों के लिए यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक है। हालांकि इसकी जड़ें हिंदू पौराणिक कथाओं में गहरी हैं, लेकिन आज यह एक खूबसूरत धर्मनिरपेक्ष त्योहार बन चुका है, जिसमें बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्ग एक साथ शामिल होते हैं।
यह कब मनाया जाता है?
यह त्योहार मलयाली महीने चिंगम (अगस्त-सितंबर) में आता है, जो मलयालम कैलेंडर का पहला महीना होता है। यह संपूर्ण उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जिसका समापन सबसे मुख्य और भव्य दिन 'थिरुवोणम' पर होता है।
वर्ष 2027 मुख्य तिथि एवं नक्षत्र मुहूर्त
वर्ष 2027 में मुख्य ओणम यानी थिरुवोणम का पावन पर्व रविवार, 12 सितंबर को मनाया जाएगा। इस वर्ष के मुख्य नक्षत्र मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- थिरुवोणम् नक्षत्रम् प्रारम्भ: 11 सितंबर 2027 को देर रात्रि 26:58+ बजे से (यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 12 सितंबर की भोर में 02:58 बजे)
- थिरुवोणम् नक्षत्रम् समाप्त: 12 सितंबर 2027 को देर रात्रि 30:04+ बजे तक (यानी अगले दिन 13 सितंबर की सुबह 06:04 बजे तक)
- विशेष: चूंकि मुख्य थिरुवोणम नक्षत्र 12 सितंबर को सूर्योदय से लेकर पूरी रात व्याप्त रहेगा, इसलिए रविवार, 12 सितंबर 2027 को ही ओणम का मुख्य उत्सव, महाभोज (साध्या) और राजा महाबली की विदाई का अनुष्ठान अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न किया जाएगा।
वर्ष 2027 के महत्वपूर्ण ग्रह, नक्षत्र और मुख्य ज्योतिषीय योग
ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टिकोण से वर्ष 2027 का ओणम सुख-समृद्धि और उत्सव के उल्लास को कई गुना बढ़ाने वाले अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है:
- रविवार और सूर्य की स्वराशि का प्रभाव: इस वर्ष थिरुवोणम रविवार के दिन पड़ रहा है। इस समय ग्रहों के राजा सूर्य देव अपनी स्वयं की राशि सिंह (चिंगम मास) में गोचर कर रहे होंगे। सूर्य की यह स्थिति समाज में सुख, आरोग्यता, समृद्धि और नेतृत्व क्षमता का विकास करने वाली है।
- मकर राशि में चंद्रमा और श्रवण नक्षत्र का मेल: उत्सव के इस मुख्य दिन चंद्रमा अपनी मकर राशि में संचार करेंगे। मकर राशि में श्रवण (थिरुवोणम) नक्षत्र का होना और उस पर देवगुरु बृहस्पति की शुभ दृष्टि बनना एक अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी राजयोग का निर्माण करता है, जिसे 'गजकेसरी योग' का प्रभाव माना जाता है। यह योग आर्थिक संपन्नता और वैभव लाता है।
- सौभाग्य और शोभन योग: 12 सितंबर 2027 को ऐश्वर्य को बढ़ाने वाला 'सौभाग्य योग' और सुंदरता का प्रतीक 'शोभन योग' बन रहा है, जो इस बार के ओणम उत्सव में नृत्य, संगीत और फूलों की सजावट को और अधिक ऊर्जावान बनाएगा।
राजा महाबली की पौराणिक कथा
ओणम की पूरी कहानी पौराणिक राजा महाबली के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक अत्यंत उदार, सत्यवादी और न्यायप्रिय असुर राजा थे।
- केरल का स्वर्ण युग: राजा महाबली के शासनकाल में केरल में 'स्वर्ण युग' था। उनकी प्रजा बेहद खुशहाल थी; वहाँ न कोई गरीब था, न कोई अपराध था और हर कोई समान था।
- देवताओं की चिंता और वामन अवतार: महाबली की बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति से देवराज इंद्र और अन्य देवता चिंतित होने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता मांगी। तब भगवान विष्णु ने वामन (एक बौने ब्राह्मण) का अवतार लिया और महाबली की दानशीलता की परीक्षा लेने उनकी सभा में पहुंचे।
- तीन पग भूमि का दान: वामन देव ने राजा से मात्र तीन पग भूमि दान में मांगी। जब महाबली इसके लिए मान गए, तो वामन देव ने अपना विशाल आकार बढ़ाकर दो ही कदमों में पूरी धरती और आकाश नाप लिया।
- महाबली का महान बलिदान: तीसरे कदम के लिए जगह न बचने पर, वचन के पक्के महाबली ने विनम्रता से अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने उनके सिर पर पैर रखा और उन्हें सुतल लोक (पाताल) भेज दिया।
- सालाना वापसी का वरदान: महाबली की इस परम भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रिय प्रजा से मिलने धरती पर आने का वरदान दिया। मान्यता है कि ओणम का यह पावन पर्व इसी वार्षिक वापसी की खुशी में राजा महाबली के स्वागत के लिए मनाया जाता है।
ओणम कैसे मनाया जाता है?
ओणम के 10 दिनों में हर दिन का अपना विशेष महत्व है, जिसमें निम्नलिखित मुख्य आकर्षण शामिल हैं:
1. पूक्कलम (फूलों की भव्य रंगोली)
ओणम की सबसे सुंदर और मनमोहक परंपरा पूक्कलम है। राजा महाबली के स्वागत के लिए घरों के मुख्य द्वार के सामने ताजे फूलों से कलात्मक रंगोली बनाई जाती है। उत्सव के पहले दिन (अथम) से यह आकार में छोटी शुरू होती है और दसवें दिन (थिरुवोणम) तक हर दिन नए फूलों के साथ बहुत बड़ी और भव्य हो जाती है।
2. ओणम साध्या (शाही और पारंपरिक महाभोज)
ओणम साध्या इस त्योहार का सबसे मुख्य और स्वादिष्ट आकर्षण है।
- भोजन: यह एक पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी दावत होती है जिसे पारंपरिक तरीके से केले के पत्ते पर परोसा जाता है।
- व्यंजन: एक पारंपरिक साध्या में लगभग 26 या उससे अधिक प्रकार के व्यंजन होते हैं, जिनमें अविअल, थोरन, ओलन, कालम, सांभर, रसम और मिठाई के रूप में स्वादिष्ट 'पायसम' शामिल हैं।
- महत्व: यह सामूहिक भोज समानता का प्रतीक है, जहाँ समाज का हर अमीर-गरीब वर्ग एक साथ बैठकर भोजन करता है।
3. वल्लम कली (रोमांचक नौका दौड़)
केरल के बैकवाटर्स (नदियों और झीलों) में इस दौरान विशाल 'सर्प नौकाओं' (स्नेक बोट्स) की ऐतिहासिक दौड़ होती है। इसकी 'नेहरू ट्रॉफी बोट रेस' विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें सैकड़ों मल्लाह पारंपरिक लोकगीतों (वंचिपातु) की जोशीली लय पर एक साथ ताल मिलाकर नाव चलाते हैं।
4. पुलिकली (रोमांचक बाघ नृत्य)
यह केरल की एक अनोखी लोक कला है। इसमें कलाकार अपने पूरे शरीर पर बाघ, शेर और तेंदुए की तरह पीले, लाल और काले रंग से जीवंत पेंट करते हैं। वे पारंपरिक ढोल (चेंडा) की थाप पर बाघ की तरह शिकार करने के अंदाज में नृत्य करते हैं, जो दर्शकों को बेहद रोमांचित करता है।
आधुनिक और वैश्विक महत्व
आज के समय में ओणम केवल केरल की सीमाओं तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों (जैसे दुबई), यूरोप और अमेरिका में रहने वाले मलयाली समुदाय भी इसे वैश्विक स्तर पर बहुत धूमधाम से मनाते हैं। वर्ष 2027 की यह ओणम, थिरुवोणम नक्षत्र और सौभाग्य योग के महासंयोग के कारण वैश्विक स्तर पर आपसी भाईचारे और समृद्धि को नई दिशा देगी। यह त्योहार हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, उदारता, न्याय और समानता ही एक आदर्श और खुशहाल समाज की असली नींव हैं।

