हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्व है जो हिंदू देवता हनुमान के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह भारत के विभिन्न भागों में परंपरानुसार अलग-अलग समय एवं तिथियों को मनाया जाता है; उत्तरी भारत के अधिकाँश क्षेत्रों में यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है|इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था यह माना जाता है।
हनुमान जयंती की व्रत कथा
एक बार अग्निदेव से मिली खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को बांट दिया। कैकयी को जब खीर मिली तो चील ने झपट्टा मारकर उसे छीन लिया और उसे अपने मुंह में लेकर उड़ गई। उड़ते-उड़ते रास्ते में जब चील अंजना माता के आश्रम के ऊपर से गुजर रही थी तो माता अंजना ऊपर की ओर देख रही थी और उनका मुंह खुला होने की वजह से खीर उनके मुंह में गिर गई और उन्होंने उस खीर को गटक लिया। इससे उनके गर्भ में शिवजी के अवतार हनुमानजी आ गए और फिर उनका जन्म हुआ।हनुमानजी के जन्म के विषय में दूसरी कथा यह है कि समुद्रमंथन के बाद जब भगवान शिव ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने को कहा था जो उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों को दिखाया था। उनकी बात का मान रखते हुए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु का आकर्षक रूप देखकर शिवजी आकर्षित होकर कामातुर हो गए और उन्होंने अपना वीर्य गिरा दिया। जिसे पवनदेव ने शिवजी के वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। इस तरह माता अंजना के गर्भ से वानर रूप में हनुमानजी का जन्म हुआ। उन्हें शिव का 11वां रूद्र अवतार माना जाता है।
श्री हनुमान जी का जन्म माता अंजनी और पिता केसरी के घर हुआ, तथा वायु देव की कृपा से वे पवनपुत्र कहलाए। बचपन से ही उनमें असाधारण शक्ति और तेज था; एक बार उन्होंने उगते हुए सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की, जिससे सृष्टि में अंधकार फैल गया, तब इंद्र देव ने वज्र से उन्हें चोट पहुंचाई, परंतु इस घटना के बाद सभी देवताओं ने उन्हें असीम बल, बुद्धि, निरोगता और अमरता के वरदान दिए। बाद में ऋषियों के श्राप के कारण वे अपनी शक्तियों को भूल गए, परंतु समय आने पर उन्हें याद दिलाया गया। जब भगवान राम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज कर रहे थे, तब हनुमान जी ने ब्राह्मण का वेश धारण कर उनसे भेंट की और उनकी विनम्रता, ज्ञान और सेवा भावना से प्रभावित होकर राम ने उन्हें अपना सबसे प्रिय भक्त बना लिया। इसके बाद जब रावण द्वारा सीता जी का हरण कर उन्हें लंका ले जाया गया, तब हनुमान जी ने समुद्र को एक ही छलांग में पार कर लंका पहुंचने का अद्भुत कार्य किया, वहां उन्होंने अनेक बाधाओं को पार किया, अशोक वाटिका में सीता जी को खोजा, उन्हें राम जी की अंगूठी देकर विश्वास दिलाया और उनका संदेश राम तक पहुंचाने का वचन लिया। लौटते समय उन्होंने रावण की सभा में अपने साहस का परिचय दिया और अपनी पूंछ में आग लगने पर पूरी लंका को जला दिया,जिससे रावण की शक्ति को चुनौती मिली। इसके बाद लंका युद्ध में हनुमान जी ने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं; जब लक्ष्मण शक्ति बाण से मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लाने गए, लेकिन सही जड़ी-बूटी पहचान न पाने के कारण पूरा पर्वत ही उठा लाए, जिससे लक्ष्मण के प्राण बच सके। हनुमान जी की भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण भगवान राम की सेवा में अर्पित कर दिया; वे न केवल बल और वीरता के प्रतीक हैं, बल्कि विनम्रता, निष्ठा और सच्चे सेवक धर्म के आदर्श भी हैं। यही कारण है कि उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, और माना जाता है कि सच्चे मन से उनकी पूजा करने तथा हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी बाधाएं, भय और कष्ट दूर हो जाते हैं, और जीवन में साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हनुमान जयंती मनाने की प्रमुख परंपराएं:
1.उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान): हनुमान मंदिरों (जैसे अयोध्या, मेहंदीपुर बालाजी) में भक्तों की भारी भीड़ होती है। यहाँ हनुमान जी को चोला (सिंदूर और चांदी का वर्क) चढ़ाया जाता है। सुबह सरयू जैसी पवित्र नदियों में स्नान कर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
2.ओडिशा: यहाँ हनुमान जयंती को 'पाना संक्रांति' के रूप में मनाया जाता है, जो ओडिया नव वर्ष की शुरुआत भी है। भक्त मंदिरों में पूजा करते हैं और विशेष प्रसाद वितरण किया जाता है।
3.दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक): इन राज्यों में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है, न कि चैत्र पूर्णिमा को। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह चैत्र पूर्णिमा से लेकर वैशाख महीने तक विशेष उत्सवों के साथ मनाया जाता है।
4.गुजरात: गुजरात के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों (जैसे दांडी हनुमान) में विशेष पूजा और भव्य आरती का आयोजन होता है।
5.सांस्कृतिक आयोजन: कई शहरों में लोग पारंपरिक वेशभूषा में हनुमान जी के भेष में जुलूस निकालते हैं और ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हैं।
मुख्य अनुष्ठान:
1.हनुमान चालीसा/सुंदरकांड: भक्त सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा/सुंदरकांड का पाठ करते हैं।
2.सिंदूर और चोला: हनुमान जी को लाल सिंदूर प्रिय है, इसलिए उन्हें विशेष चोला चढ़ाया जाता है।
3.भंडारा: मंदिरों और मोहल्लों में प्रसाद के रूप में भोजन का वितरण किया जाता है।

