गुरु पूर्णिमा (जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं) आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का पावन दिन है। यह दिन आदि गुरु महर्षि वेदव्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों की रचना की थी। इस दिन शिष्य गुरुओं की पूजा कर उनका आशीर्वाद लेते हैं।गुरु पूर्णिमा की कथा भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान और उनके महत्व को गहराई से समझाती है। यह पवित्र दिन विशेष रूप से वेद व्यास को समर्पित है, जिन्हें “व्यास पूर्णिमा” के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन उनका जन्म हुआ था।
वेद व्यास ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—ताकि सामान्य लोग भी ज्ञान को समझ सकें। उन्होंने महान ग्रंथ महाभारत की रचना की, जिसमें जीवन, धर्म, कर्तव्य और सत्य का गहरा संदेश दिया गया है। उनके इस अद्भुत योगदान के कारण उन्हें “आदि गुरु” कहा जाता है, और गुरु पूर्णिमा के दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।एक और महत्वपूर्ण कथा बौद्ध परंपरा से जुड़ी है। कहा जाता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम बुद्ध ने सबसे पहले अपने पाँच शिष्यों को सारनाथ में उपदेश दिया था।
इस घटना को “धर्मचक्र प्रवर्तन” कहा जाता है, जिसका अर्थ है—धर्म के चक्र को चलाना। यह दिन गुरु के रूप में बुद्ध के प्रथम उपदेश का प्रतीक बन गया और बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व स्थापित हुआ।हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। एक प्रसिद्ध श्लोक है—“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः”, जिसका अर्थ है कि गुरु ही सृष्टि के रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता के समान हैं। गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
इस दिन की कथा हमें यह भी सिखाती है कि गुरु केवल धार्मिक या आध्यात्मिक शिक्षक ही नहीं होते, बल्कि जीवन में हमें सही दिशा दिखाने वाले हर व्यक्ति—जैसे माता-पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक—भी गुरु के समान होते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्य अपने गुरु के चरण स्पर्श करते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।अंततः, गुरु पूर्णिमा की कथा हमें यह समझाती है कि जीवन में सफलता, ज्ञान और सही मार्ग पाने के लिए गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु ही वह दीपक हैं, जो हमारे जीवन के अंधकार को दूर करके हमें सत्य, ज्ञान और सफलता की ओर अग्रसर करते हैं।

