Online Puja & Pandit Booking
+91 91115 12346

गुरु नानक जयंती

गुरु नानक जयंती 2027 :

गुरु नानक जयंती, जिसे 'गुरुपरब' या 'प्रकाश पर्व' भी कहा जाता है, सिख धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गुरु नानक जी एक महान दार्शनिक, समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने दुनिया को प्रेम, समानता, और भाईचारे का संदेश दिया। वर्ष 2027 में गुरु नानक देव जी की 558वीं जन्म वर्षगाँठ मनाई जा रही है।

गुरु नानक जयंती क्या है और कब मनाई जाती है ?

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन राय भोई की तलवंडी (जो अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब में है) में हुआ था। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। इस दिन को "प्रकाश उत्सव" इसलिए कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि गुरु नानक जी के जन्म से संसार में फैले अज्ञानता और अंधकार का नाश हुआ और चारों ओर ज्ञान का प्रकाश फैला।

वर्ष 2027: तिथि और मुख्य मुहूर्त

वर्ष 2027 में गुरु नानक जयंती रविवार, नवम्बर 14, 2027 को मनाई जाएगी। पर्व की मुख्य तिथियाँ और समय इस प्रकार हैं:

  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: शनिवार, नवम्बर 13, 2027 को सुबह 09:55 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: रविवार, नवम्बर 14, 2027 को सुबह 08:55 बजे तक
  • मुख्य उत्सव (उदयातिथि): चूंकि पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 14 नवम्बर को हो रहा है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार मुख्य पर्व और अमृत वेला के धार्मिक अनुष्ठान 14 नवम्बर (रविवार) को ही संपन्न किए जाएंगे।

वर्ष 2027 का ज्योतिषीय महत्व: महत्वपूर्ण ग्रह, नक्षत्र और तिथि संयोग

वर्ष 2027 की कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से अत्यधिक फलदायी है, क्योंकि इस दिन आकाश मंडल में कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं:

  1. कृतिका और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव: 14 नवम्बर 2027 को चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जहाँ वे रोहिणी नक्षत्र (चंद्रमा का स्वयं का प्रिय नक्षत्र) में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव तुला राशि में विशाखा नक्षत्र में गोचर कर रहे होंगे।
  2. शुभ योग: इस दिन 'बुधादित्य योग' और 'गजकेसरी योग' का सुंदर प्रभाव देखने को मिलेगा, जो ज्ञान, अध्यात्म, और आत्मिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। रविवार का दिन और पूर्णिमा का यह मिलन समाज में सुख और समृद्धि की वृद्धि करने वाला है।

हिंदू पौराणिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक जुड़ाव

यद्यपि गुरु नानक जयंती मुख्य रूप से सिख धर्म का त्योहार है, लेकिन सनातन (हिंदू) परंपरा और पौराणिक दृष्टिकोण से भी इसका गहरा संबंध है। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन 'देव दीपावली' मनाई जाती है और भगवान विष्णु के 'मत्स्य अवतार' तथा भगवान शिव द्वारा 'त्रिपुरासुर' के वध का उत्सव मनाया जाता है।

इसी महा-पुण्यकाल में गुरु नानक जी का अवतरण हुआ था। गुरु नानक देव जी का जन्म एक क्षत्रिय (बेदी) परिवार में हुआ था। उन्होंने वेदों और उपनिषदों के सार—"एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति" (सत्य एक है, विद्वान उसे अलग-अलग नामों से बुलाते हैं)—को "इक्क ओंकार" (ईश्वर एक है) के रूप में सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाया। उस दौर में जब समाज जाति-पाति, छुआछूत और अंधविश्वास में जकड़ा हुआ था, गुरु नानक जी ने हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के लोगों को सच्चे अध्यात्म का मार्ग दिखाया। हिंदू समाज में उन्हें एक महान संत और दिव्य अवतार के रूप में आज भी अत्यधिक सम्मान प्राप्त है।

गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है ?

इस महापर्व की तैयारियाँ कई दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। उत्सव को मुख्य रूप से निम्नलिखित चरणों में मनाया जाता है:

1. प्रभात फेरी

गुरुपरब से लगभग एक सप्ताह पहले, सुबह के शुरुआती घंटों (अमृत वेला) में गुरुद्वारों से 'प्रभात फेरियाँ' निकाली जाती हैं। लोग भजनों और शबदों का कीर्तन करते हुए गलियों से गुजरते हैं और चारों ओर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

2. अखंड पाठ

उत्सव के मुख्य दिन से ठीक 48 घंटे पहले (यानी 12 नवम्बर 2027 से), गुरुद्वारों में सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' का निरंतर, बिना रुके पाठ शुरू किया जाता है, जिसे अखंड पाठ कहते हैं। इसका समापन ठीक गुरु नानक जयंती (14 नवम्बर) के दिन सुबह होता है।

3. नगर कीर्तन (जुलूस)

जयंती से एक दिन पहले (13 नवम्बर 2027 को) एक विशाल जुलूस निकाला जाता है, जिसे 'नगर कीर्तन' कहते हैं। इस जुलूस का नेतृत्व 'पंज प्यारे' (पाँच प्रिय) करते हैं, जो सिख ध्वज (निशान साहिब) लेकर चलते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब को एक सुंदर पालकी में सजाकर नगर में घुमाया जाता है। श्रद्धालु सड़कों की सफाई करते हैं और जुलूस के आगे पानी छिड़कते हैं। 'गटका' (पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन इस जुलूस का मुख्य आकर्षण होता है।

इस दिन की मुख्य परंपराएं और "पूजा विधि"

गुरु नानक जयंती के दिन (14 नवम्बर) श्रद्धालु बेहद सात्विक और भक्तिमय दिनचर्या का पालन करते हैं:

  1. अमृत वेला स्नान और ध्यान: भक्त सुबह जल्दी (लगभग 4 बजे) उठकर स्नान करते हैं। इस समय को 'अमृत वेला' कहा जाता है। सुबह के समय 'जपुजी साहिब' और 'आसा दी वार' का पाठ किया जाता है।
  2. गुरुद्वारा दर्शन और अरदास: लोग नए वस्त्र पहनकर गुरुद्वारे जाते हैं। गुरुद्वारे को फूलों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया जाता है। गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेककर आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद कथा, कीर्तन और गुरबाणी का श्रवण किया जाता है, जिसके बाद सामूहिक रूप से 'अरदास' (प्रार्थना) होती है।
  3. कड़ाह प्रसाद का वितरण: पूजा और अरदास के बाद भक्तों को 'कड़ाह प्रसाद' (सूजी, घी और चीनी से बना हलवा) दिया जाता है। इसे बेहद पवित्र माना जाता है।
  4. लंगर सेवा: इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण 'लंगर' (सामूहिक भोज) है। गुरुद्वारे में अमीर-गरीब, जाति-पाति का भेद भूलकर सभी लोग एक साथ जमीन पर बैठकर शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। इस सेवा में हाथ बटाना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
  5. दीपमाला (रात का उत्सव): शाम के समय गुरुद्वारों और घरों में दीपक, मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं और आतिशबाजी की जाती है। यह दृश्य दीपावली की तरह ही मनमोहक होता है।

गुरु नानक देव जी से जुड़ी प्रेरक कहानियाँ (साखियाँ)

गुरु नानक जी के जीवन की कहानियों को 'साखियाँ' कहा जाता है। ये कहानियाँ आज भी मानवता को सही राह दिखाती हैं:

1. सच्चा सौदा
जब गुरु नानक जी युवा थे, तो उनके पिता मेहता कालू जी ने उन्हें व्यापार सीखने के लिए 20 रुपये दिए और कहा कि शहर जाकर कोई "सच्चा सौदा" (लाभदायक सौदा) करके आओ। रास्ते में नानक जी को साधुओं और भूखे लोगों की एक टोली मिली जो कई दिनों से भूखी थी। नानक जी ने उन 20 रुपयों से भोजन खरीदा और सभी भूखे साधुओं को खिला दिया। जब वे खाली हाथ घर लौटे, तो पिता के पूछने पर उन्होंने कहा कि वे दुनिया का सबसे 'सच्चा सौदा' करके आए हैं, क्योंकि भूखों को भोजन कराने से बड़ा कोई व्यापार नहीं हो सकता।

2. मलिक भागो और भाई लालो की कहानी
एक बार नानक जी ऐमनाबाद पहुंचे। वहाँ उन्होंने एक गरीब, ईमानदार बढ़ई 'भाई लालो' के घर सूखी रотियाँ खाईं। उसी समय शहर के अमीर और भ्रष्ट दीवान 'मलिक भागो' ने एक बड़ा भोज आयोजित किया और नानक जी को आमंत्रित किया। नानक जी ने जाने से मना कर दिया। जब मलिक भागो ने इसका कारण पूछा, तो नानक जी ने एक हाथ में मलिक भागो का शाही पकवान और दूसरे हाथ में भाई लालो की सूखी रोटी ली और दोनों को दबाया। मलिक भागो के पकवान से खून की बूंदें टपकीं (क्योंकि वह गरीबों के शोषण की कमाई थी) और भाई लालो की रोटी से दूध की धारा बही (क्योंकि वह ईमानदारी और मेहनत की कमाई थी)। इससे समाज को संदेश मिला कि ईमानदारी की कमाई ही सबसे पवित्र है।

3. मक्का की यात्रा
अपनी आध्यात्मिक यात्राओं (उदासी) के दौरान गुरु नानक जी मक्का पहुंचे। रात को वे काबा की तरफ पैर करके सो गए। यह देखकर वहाँ का काजी बेहद क्रोधित हुआ और बोला, "ऐ नादान! तू खुदा के घर की तरफ पैर करके क्यों सोया है?" गुरु नानक जी ने शांति से उत्तर दिया, "भाई! मुझे माफ करना। तुम मेरे पैर उस दिशा में घुमा दो, जिस दिशा में खुदा (ईश्वर) न हो।" काजी ने जैसे ही नानक जी के पैर दूसरी दिशा में किए, उसे हर दिशा में काबा ही नजर आने लगा। काजी को समझ आ गया कि ईश्वर किसी एक दिशा या इमारत में नहीं, बल्कि कण-कण में व्याप्त है।

गुरु नानक देव जी के मुख्य तीन सिद्धांत

गुरु नानक जी ने जीवन जीने के लिए तीन बेहद सरल और व्यावहारिक सिद्धांत दिए, जो आज के समाज के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक हैं:

  • कीरत करो: इसका अर्थ है कि हर मनुष्य को अपनी आजीविका पूरी ईमानदारी, लगन और मेहनत से कमानी चाहिए। किसी का हक मारकर या गलत रास्ते पर चलकर धन नहीं कमाना चाहिए।
  • नाम जपो: इसका अर्थ है कि संसार के कार्यों को करते हुए भी हर समय ईश्वर को याद रखना चाहिए और उनका सिमरन करना चाहिए, ताकि मन में अहंकार न आए।
  • वंड छको: इसका अर्थ है कि अपनी कमाई का एक हिस्सा हमेशा जरूरतमंदों, गरीबों और असहाय लोगों में बाँटकर खाना चाहिए। अकेले उपभोग करने के बजाय समाज के कल्याण में योगदान देना चाहिए।

निष्कर्ष

गुरु नानक जयंती केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानवता, करुणा, सेवा और समानता का जीवंत उत्सव है। वर्ष 2027 में हिंदू पौराणिक काल की कार्तिक पूर्णिमा और दुर्लभ ग्रहीय नक्षत्रों के पावन संयोग पर आने वाला यह पर्व हमें याद दिलाता है कि ईश्वर एक है और उसकी नजरों में कोई छोटा या बड़ा नहीं है। इस दिन गुरुद्वारे जाकर सेवा करना, लंगर चखना और गुरु नानक जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना ही इस प्रकाश पर्व की सच्ची सार्थकता है।

For Customer
Login Register
Join as Partner

Become Pandit, Agent or Associate
Click below button to register or login

Join as Partner

For any query call us:

+91 9111512346
Your Cart

Your cart is currently empty.
Let us help you find the perfect item!