Online Puja & Pandit Booking
+91 91115 12346

अनिरुद्ध चतुर्थी

अनिरुद्ध चतुर्थी: संकटमोचन और अटूट भक्ति का महापर्व

अनिरुद्ध चतुर्थी हिंदू धर्म में, विशेष रूप से श्री अनिरुद्ध उपासना मार्ग में, एक अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली दिन माना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के 'चतुर्व्यूह' अवतारों में से एक, भगवान अनिरुद्ध की ऊर्जा और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है। 'अनिरुद्ध' शब्द का अर्थ ही है— "जिसे कोई रोक न सके"। मान्यता है कि इस दिन की गई पुकार सीधे ईश्वर तक पहुँचती है और जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा टल जाती है।

यह पर्व कब आता है?

अनिरुद्ध चतुर्थी प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह गणेश उत्सव के ठीक बाद का समय होता है, जब चारों ओर भक्ति का वातावरण बना रहता है।

वर्ष 2027 पूजा मुहूर्त एवं तिथियाँ

वर्ष 2027 में अनिरुद्ध चतुर्थी का पावन पर्व बुधवार, 7 जुलाई को मनाया जाएगा। इस वर्ष के मुख्य मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 6 जुलाई 2027 को रात्रि 21:48 बजे से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 जुलाई 2027 को सायंकाल 18:43 बजे तक
  • चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त (मुख्य पूजा समय): सुबह 11:03 से दोपहर 13:49 तक
  • कुल अवधि: 02 घण्टे 47 मिनट्स

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय: सुबह 08:58 से रात्रि 21:57 तक (अवधि: 12 घण्टे 59 मिनट्स)
विशेष नोट: इस दिन चन्द्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं, इसलिए वर्जित समय के दौरान आकाश की ओर देखने से बचना चाहिए।

वर्ष 2027 के महत्वपूर्ण ग्रह, नक्षत्र और योग

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2027 की यह चतुर्थी बेहद दुर्लभ और कल्याणकारी संयोग लेकर आ रही है:

  1. बुधवार का अद्भुत संयोग: यह चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार के स्वामी स्वयं भगवान गणेश और बुद्धि के प्रदाता 'बुध ग्रह' हैं। चूंकि भगवान अनिरुद्ध 'मन के अधिष्ठाता देव' हैं, इसलिए बुधवार को इस चतुर्थी का आना मन, बुद्धि और चेतना के संतुलन के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
  2. मघा और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र: इस दिन आकाश मंडल में मघा नक्षत्र की समाप्ति और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रवेश होगा। सिंह राशि का प्रभाव होने के कारण यह समय प्रशासनिक कार्यों में सफलता और आत्मविश्वास में वृद्धि करने वाला है।
  3. सिद्धि और साध्य योग: 7 जुलाई 2027 को आध्यात्मिक साधनाओं को सिद्ध करने वाला 'सिद्धि योग' बन रहा है, जो भक्तों की मानसिक और शारीरिक बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी रहेगा।

पावन पौराणिक और दिव्य कथाएँ

बाणासुर का गर्व और अनिरुद्ध की वीरता

सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री उषा की है। उषा ने स्वप्न में अनिरुद्ध को देखा और उनसे प्रेम कर बैठी। उसकी सखी चित्रलेखा ने अपनी मायावी शक्ति से सोए हुए अनिरुद्ध को द्वारका से उठाकर बाणासुर के महल में पहुँचा दिया। जब बाणासुर को यह पता चला, तो उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया।

भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और प्रद्युम्न ने बाणासुर की विशाल सेना और स्वयं भगवान शिव (जो बाणासुर के रक्षक थे) से युद्ध किया। अंततः, सत्य की विजय हुई और अनिरुद्ध मुक्त हुए। यह कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर अपने भक्त की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं।

मन के अधिष्ठाता देव

शास्त्रों के अनुसार, भगवान अनिरुद्ध को 'मन' का देवता माना जाता है। जैसे मन की गति को कोई रोक नहीं सकता, वैसे ही भगवान अनिरुद्ध की शक्ति अजेय है। उनकी कृपा से चंचल मन शांत होता है और एकाग्रता प्राप्त होती है।

सम्पूर्ण पूजन विधि

अनिरुद्ध चतुर्थी का पूजन सात्विक और भक्तिमय होता है। इसकी मुख्य विधि निम्नलिखित है:

  • पवित्रता: प्रातः काल स्नानादि के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, जो शांति और शुद्धता के प्रतीक हैं।
  • स्थापना: एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान अनिरुद्ध की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही प्रथम पूज्य भगवान गणेश का भी आह्वान करें।
  • कलश और दीप: उनके समक्ष जल से भरा एक कलश रखें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। चमेली या केवड़े की धूप से वातावरण को सुगन्धित करें।
  • अर्पण: भगवान को चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें पीले पुष्प और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इन्हें अवश्य अर्पित करें।
  • विशेष पाठ: इस दिन 'घोरकष्टोद्धारण स्तोत्र' का पाठ करना सबसे अनिवार्य माना जाता है। यह स्तोत्र जीवन के कठिन समय में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
  • क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि "हे प्रभु, मेरे अहंकार को दूर करें और मुझे अपनी शरण में रखें।"

भोग और नैवेद्य

चूंकि यह चतुर्थी तिथि है, इसलिए भगवान गणेश के प्रिय मोदक और बेसन के लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त, दूध से बनी सफेद खीर और मौसमी फलों का नैवेद्य अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस दिन भक्त क्या करते हैं?

  1. सामूहिक उपासना: इस दिन भक्त बड़ी संख्या में उपासना केंद्रों पर एकत्रित होते हैं और सामूहिक रूप से "हरि ॐ" और "अम्बज्ञ" के जयकारे लगाते हैं।
  2. सेवा कार्य: भगवान अनिरुद्ध को 'सेवा' बहुत प्रिय है। भक्त इस दिन भूखों को भोजन कराते हैं, गरीबों की सहायता करते हैं या पशु-पक्षियों की सेवा करते हैं।
  3. अखंड नाम जप: कई भक्त इस दिन मौन रखकर मानसिक रूप से भगवान के नाम का जप करते हैं ताकि उनकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ सके।

अनिरुद्ध चतुर्थी के अद्भुत लाभ

इस महापर्व को मनाने से भक्त के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं:

  • सुरक्षा कवच : भक्त को अनुभव होता है कि एक अदृश्य दैवीय शक्ति हर कदम पर उसकी रक्षा कर रही है।
  • कष्टों का निवारण : जीवन के वे संकट जिनका कोई समाधान नहीं दिख रहा हो, वे इस दिन की पूजा से धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
  • मानसिक शांति : क्योंकि अनिरुद्ध मन के स्वामी हैं, उनकी पूजा से तनाव, अवसाद और मानसिक अस्थिरता दूर होती है।
  • इच्छाओं की पूर्ति : निस्वार्थ भाव से की गई प्रार्थना से भक्त की जायज मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

भगवान अनिरुद्ध का दिव्य स्वरूप

ध्यान के लिए उनका स्वरूप अत्यंत सौम्य और तेजस्वी है। वे नील वर्ण के हैं, उनके चार हाथ हैं जिनमें वे शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। उनकी मंद मुस्कान भक्त के हृदय में अटूट विश्वास पैदा करती है कि "मेरा ईश्वर मेरे साथ है।"

निष्कर्ष

अनिरुद्ध चतुर्थी केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ अपने संबंध को गहरा करने का अवसर है। वर्ष 2027 की यह चतुर्थी बुध-योग और सिद्धि-योग के कारण मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति के लिए बेहद खास है। यह दिन हमें सिखाता है कि जब हम अपनी समस्याओं को भगवान अनिरुद्ध के चरणों में छोड़ देते हैं, तो वे हमारी नैया को हर तूफान से बाहर निकाल लेते हैं।

For Customer
Login Register
Join as Partner

Become Pandit, Agent or Associate
Click below button to register or login

Join as Partner

For any query call us:

+91 9111512346
Your Cart

Your cart is currently empty.
Let us help you find the perfect item!